Shahpur: जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए सूबेदार पवन कुमार जरयाल का नाम अब राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) के त्याग चक्र में हमेशा के लिए चमकेगा। केंद्र सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में जारी की गई छह सैनिकों की लिस्ट में उनका नाम पहले नंबर पर है।
पति के सर्वोच्च बलिदान पर वीरनारी सुषमा जरयाल का संदेश
बलिदानी सूबेदार पवन कुमार की पत्नी वीरनारी सुषमा जरयाल ने भावुक होते हुए कहा कि जब उनके घायल होने की सूचना आई थी, तब हमने सोच लिया था कि यदि वह लौट आए तो हमारे हैं, नहीं तो देश के हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और वह अपने बच्चों को भी सेना में भेजेंगी।
पिता और बेटी अनामिका ने जताया पिता के साहस पर गर्व
बलिदानी के पिता सेवानिवृत्त हवलदार गरज सिंह ने कहा कि उनके बेटे ने देश की रक्षा में अमर होकर वह काम कर दिखाया जो वह खुद अपने सैन्य जीवन में नहीं कर पाए थे। वहीं बेटी अनामिका ने कहा कि उनके पिता का नाम आज पूरे परिवार को समाज में गर्व से सिर उठाकर जीने की बड़ी शक्ति देता है।
पाकिस्तानी गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देते हुए हुए थे शहीद
सूबेदार मेजर पवन कुमार जरियाल 25 पंजाब रेजिमेंट के जांबाज सैन्य कर्मी थे और उस समय 10 ब्रिगेड में अपनी सेवाएं दे रहे थे। 9 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ (कृष्णाघाटी) सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की तरफ से हो रही भारी गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देते हुए वह देश के लिए शहीद हो गए थे।
रिटायरमेंट से ठीक पहले स्वेच्छा से चुनी थी कठिन पोस्टिंग
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार सूबेदार पवन कुमार को 31 अगस्त 2026 को सेना से रिटायर्ड होना था। अपने रिटायरमेंट से ठीक पहले उन्होंने अपनी अंतिम पोस्टिंग के रूप में स्वेच्छा से जम्मू-कश्मीर के सबसे संवेदनशील और कठिन बॉर्डर एरिया को चुना था। उनका पूरा परिवार आज उनकी इस देशभक्ति और असाधारण साहस पर गर्व महसूस कर रहा है।
शाहपुर के सिहोलपुरी स्थित बलिदानी के घर पर उनकी माता किशो देवी, पुत्र अभिषेक और अन्य स्वजन इस बात से संतुष्ट हैं कि उनके बेटे के बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान मिला है। हिमाचल प्रदेश के इस वीर सपूत की शहादत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा देश की रक्षा और सच्चे कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देती रहेगी।

