Fuel Price Hike: क्या थम जाएगी रफ्तार? पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चौथी बढ़ोतरी से चरमराया आम जनता का बजट

Shimla News: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चौथी बार बढ़ोतरी ने आम जनता को तगड़ा झटका दिया है। ईंधन के बढ़ते दामों से लोगों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं। राजधानी शिमला में अब पेट्रोल 102.51 रुपये और डीजल 94.50 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

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पेट्रोल पंपों पर उमड़ा वाहन चालकों का भारी गुस्सा

लगातार बढ़ती कीमतें अब सीधे तौर पर लोगों की जेब पर भारी डाका डाल रही हैं। हिमाचल प्रदेश के सभी प्रमुख पेट्रोल पंपों पर तेल भरवाने आ रहे वाहन चालकों में भारी नाराजगी है। लोग सरकार और तेल कंपनियों की इस नीति को आम आदमी पर एक बड़ा आर्थिक बोझ मान रहे हैं।

संजौली के निवासी राजेश शर्मा ने कहा कि रोजाना दाम बढ़ने से मध्यम वर्ग की परेशानियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए अब अपनी निजी गाड़ी से दफ्तर जाना बेहद महंगा सौदा हो गया है। वहीं ढली की कविता ठाकुर ने कहा कि इस महंगाई ने रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

बढ़ते जेब खर्च से कॉलेज जाने वाले युवा भी बेहद परेशान

ईंधन की इस बेलगाम रफ्तार ने कॉलेज जाने वाले युवाओं और छात्रों की चिंता को भी बढ़ा दिया है। छात्र आदित्य वर्मा ने बताया कि रोजाना पढ़ाई और कोचिंग के लिए लंबा सफर करना पड़ता है। तेल महंगा होने से उनका मासिक जेब खर्च बजट से बिल्कुल बाहर चला गया है।

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टैक्सी चालक सुरेश नेगी ने चेतावनी दी कि इस बढ़ोतरी का सीधा असर बहुत जल्द सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दिखेगा। जब ईंधन लगातार महंगा होगा, तो बस और टैक्सी के किराए में भी बढ़ोतरी तय है। गृहिणी सीमा चौहान ने कहा कि महंगाई के इस दौर में अब सफर करना दूभर हो गया है।

तेल कंपनियों और सरकार की नीतियों पर उठे गंभीर सवाल

सड़क पर उतरकर कई वाहन चालकों ने तेल कंपनियों और सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की है। लोगों का आरोप है कि घाटा होने पर तेल कंपनियां तुरंत दाम बढ़ा देती हैं। इसके विपरीत जब कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से भारी मुनाफा होता है, तब जनता को कोई राहत नहीं मिलती।

आम जनता ने आरोप लगाया कि तेल कंपनियां केवल अपना मुनाफा देख रही हैं और उपभोक्ताओं का लगातार शोषण हो रहा है। वाहन चालकों को आशंका है कि अगर यही स्थिति रही, तो आने वाले समय में कीमतें और बढ़ेंगी। इसके चलते लोग अब अपने वाहनों का इस्तेमाल कम करने को मजबूर हो रहे हैं।

Author: Sunita Gupta

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