Mandi News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की ग्राम पंचायत टांडी में देव श्री सतकुढ़ी नाग जी महाराज के पावन भण्डारे का आयोजन किया गया। इस भव्य धार्मिक उत्सव में तीन प्रमुख देव शक्तियों का अनूठा मिलन हुआ। गोहर पंचायत समिति के उपाध्यक्ष खेम सिंह भारद्वाज ने इस देव मिलन को अविस्मरणीय और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया है।
देवभूमि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध धार्मिक परंपरा के अनुसार टांडी में भव्य देव मिलन संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर माता महाकाली लम्बोदर जी कलशू वाली, बड़े देव बनियुरी जी और देव श्री सतकुढ़ी नाग जी महाराज एक साथ विराजमान हुए। देव वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि और श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
हिमाचली देव संस्कृति है हमारी पहचान और सामाजिक एकता की सबसे बड़ी शक्ति
पंचायत समिति गोहर के उपाध्यक्ष खेम सिंह भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल की देव संस्कृति केवल धार्मिक परंपरा नहीं है। यह हमारी असली पहचान, विरासत और आपसी भाईचारे का आधार है। उन्होंने कहा कि सदियों से हमारे देवी-देवता समाज को सत्य, धर्म और लोककल्याण का मार्ग दिखाते आ रहे हैं।
इस विशाल भण्डारे में भाग लेने के लिए दूर-दूर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सभी भक्तों ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ देव दर्शन किए और भण्डारे का प्रसाद ग्रहण किया। इस पूरे धार्मिक आयोजन के दौरान स्थानीय समाज में प्रेम, सहयोग और समर्पण का एक बहुत ही सुंदर रूप देखने को मिला।
निस्वार्थ सेवा और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से सफल हुआ भव्य देव उत्सव
भारद्वाज ने देव समिति, कारदारों, गुरों, बाजंत्रियों, देवलुओं और ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े धार्मिक कार्यक्रम की सफलता के पीछे अनेक लोगों की निस्वार्थ सेवा होती है। लोगों ने भोजन व्यवस्था से लेकर स्वच्छता और अतिथियों के स्वागत की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
इस भव्य आयोजन में वरिष्ठजनों के मार्गदर्शन के साथ-साथ युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भारद्वाज ने कहा कि युवाओं की यह सक्रिय भागीदारी दर्शाती है कि हमारी नई पीढ़ी अपनी संस्कृति के प्रति समर्पित है। उन्होंने आयोजन में मिले सम्मान और स्नेह के लिए सभी क्षेत्रवासियों का धन्यवाद किया।
अंत में उन्होंने देव शक्तियों से समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की। उन्होंने किसानों की फसलों की खुशहाली और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने अपील की कि आधुनिकता के इस दौर में भी हमें अपनी गौरवशाली धार्मिक धरोहर को सुरक्षित रखना चाहिए।

