Business News: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव आया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने के संकेतों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतों में जल्द ही बड़ी नरमी आने की उम्मीद है।
इस बीच कूटनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों ने ईंधन बाजार को लेकर एक बड़ी चेतावनी भी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आपूर्ति में रुकावट, ऊर्जा ढांचों को पहुंचे नुकसान और बेहद सीमित वैश्विक भंडार के कारण आने वाले कई महीनों तक ईंधन बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से घटेगा बाजार का तनाव
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक सेहुल भट्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से ईंधन बाजारों का जोखिम काफी घट गया है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट, घरेलू ईंधन के दामों में बढ़ोतरी और उत्पाद शुल्क में कटौती से पेट्रोल-डीजल पर होने वाले नुकसान की भरपाई हो चुकी है।
इक्रा लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों को संकट से पहले के स्तर पर आने में छह महीने से एक साल का समय लग सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते प्रतिदिन लगभग एक करोड़ बैरल से अधिक तेल का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटने से भारत को होगा सीधा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरानी कच्चे तेल पर लगे कड़े प्रतिबंध पूरी तरह हटते हैं, तो भारत को सबसे ज्यादा फायदा होगा। भौगोलिक नजदीकी और ईरान की तरफ से ऐतिहासिक रूप से मिलने वाली बेहतर भुगतान शर्तें पूरी तरह से भारतीय अर्थव्यवस्था और तेल कंपनियों के पक्ष में काम करती हैं।
इक्विरस सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख मौलिक पटेल ने कहा कि समझौते की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमत लुढ़ककर 82 से 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। हालांकि वैश्विक स्तर पर तेल का भंडार कम होने से कीमतें संकट से पहले के 65 डॉलर के स्तर पर लौटना मुश्किल है।
इक्विरस का अनुमान है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें 75 से 80 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में स्थिर हो सकती हैं। भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र में जहाज ढुलाई मार्ग फिर से खुलने से कच्चे तेल की आपूर्ति बेहतर होगी और माल ढुलाई का भारी-भरकम खर्च भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
Author: Rajesh Kumar


