ADHD और महिलाओं का स्वास्थ्य: मासिक धर्म, गर्भावस्था और मेनोपॉज पर पड़ता है गंभीर असर, नए शोध में चौंकाने वाला खुलासा

Delhi News: अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) से पीड़ित महिलाओं को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक नए आयरिश वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, ADHD से ग्रस्त महिलाओं में प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) से जुड़ी समस्याएं बढ़ने की संभावना काफी अधिक होती है। इसका सीधा असर उनके मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) पर पड़ता है।

यूरोपीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस महत्वपूर्ण अध्ययन में 18 से 69 वर्ष के बीच की महिलाओं को शामिल किया गया था। इनमें स्वयं ADHD की पहचान करने वाली 377 महिलाएं और बिना ADHD वाली 225 महिलाएं शामिल थीं। शोधकर्ताओं ने इस दौरान महिलाओं के प्रीमेंस्ट्रुअल लक्षणों, प्रसवोत्तर अवसाद और रजोनिवृत्ति के विभिन्न शारीरिक और मानसिक बदलावों का गहन विश्लेषण किया।

मासिक धर्म में अनियमितता और पीएमएस का खतरा

अध्ययन के मुख्य निष्कर्षों के मुताबिक, ADHD से पीड़ित महिलाओं ने बिना इस स्थिति वाली महिलाओं की तुलना में मासिक धर्म में काफी अधिक अनियमितता दर्ज की है। स्क्रीनिंग टूल्स के आधार पर पाया गया कि इन महिलाओं में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) और प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (PMDD) की दरें भी बहुत अधिक थीं, जो उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं।

यह शोध स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि महिलाओं की प्रजनन देखभाल, दरअसल ADHD के इलाज और प्रबंधन का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। अक्सर चिकित्सा जगत में इस पहलू पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। इस स्थिति के कारण महिलाओं को हार्मोनल उतार-चढ़ाव के दौरान अधिक मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ता है।

गर्भावस्था और प्रसवोत्तर अवसाद की चुनौतियाँ

प्रसव के ठीक पहले और बाद की अवधि महिलाओं के लिए बेहद संवेदनशील होती है। अध्ययन के अनुसार, एडिनबर्ग पोस्टनैटल डिप्रेशन स्केल पर किए गए मूल्यांकन में सामने आया कि ADHD से ग्रसित महिलाएं प्रसवोत्तर अवसाद (Postnatal Depression) का शिकार होने के लिए अधिक प्रवृत्त होती हैं। इसके अलावा इस समूह में अनियोजित गर्भधारण के मामले भी अधिक देखे गए।

शोध में पाया गया कि उम्र, पहली गर्भावस्था या बच्चों की संख्या जैसे कारकों में कोई अंतर न होने के बावजूद, ADHD पीड़ित महिलाओं को प्रसव के समय अधिक जटिलताओं का सामना करना पड़ा। इस समूह में प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां अन्य महिलाओं की तुलना में काफी गंभीर रूप में दर्ज की गईं, जो चिंताजनक है।

मेनोपॉज के दौरान बढ़ता है मानसिक बोझ

रजोनिवृत्ति या उसके बाद के चरण में पहुँच चुकी 218 महिला प्रतिभागियों के डेटा से पता चला कि ADHD समूह में रजोनिवृत्ति के लक्षणों का बोझ बहुत अधिक था। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, इसका मतलब महिलाओं द्वारा अनुभव किए जाने वाले शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और यौन संबंधी लक्षणों की अत्यधिक गंभीरता और आवृत्ति से है।

ADHD से पीड़ित महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान चिंता, अवसाद और यौन कार्य में कमी के स्कोर भी उच्च पाए गए। हालांकि, गर्मी की लहरें (Hot Flashes) और रात में पसीना आने जैसे वासोमोटर लक्षणों में दोनों समूहों के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं दिखा। गंभीर लक्षणों के कारण इस समूह में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) का उपयोग भी काफी अधिक देखा गया।

Author: Asha Thakur

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