Uttar Pradesh News: गाजियाबाद के गली-मोहल्लों से लेकर गांवों तक में दूषित पानी की सप्लाई लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर रही है। होटलों और रेस्टोरेंटों के खाने में मिलावट और प्रदूषित पानी के कारण जिले में टायफायड का प्रकोप बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
ओपीडी की जांच में डराने वाले आंकड़े
जिला एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में बीते डेढ़ साल के भीतर बुखार से पीड़ित 16,521 मरीजों की डॉक्टरों ने टायफायड जांच कराई थी। पैथोलॉजी लैब से आई अंतिम रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के होश उड़ा दिए हैं। जांच में कुल 16,521 मरीजों में से रिकॉर्ड 14,204 लोग टायफायड पॉजिटिव पाए गए हैं।
इसके अलावा संजयनगर स्थित जिला संयुक्त अस्पताल में भी स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है। यहां 5,516 संदिग्ध मरीजों की जांच कराने पर 1,380 लोग टायफायड से संक्रमित पाए गए। हालांकि डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में इलाज के बाद अब इनमें से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं।
सरकारी पानी के सैंपल टेस्ट हुए फेल
अस्पतालों की रिपोर्ट के आधार पर जब स्वास्थ्य विभाग ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पानी के सैंपल लिए, तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। इस चालू वर्ष में जनवरी से मई तक लिए गए पानी के 1,507 नमूनों में से 237 सैंपल पूरी तरह फेल पाए गए, जबकि 1,270 सैंपल ही संतोषजनक मिले।
महीने दर महीने लगातार बढ़े मरीज
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी महीने में 559 टायफायड मरीज मिले थे। इसके बाद फरवरी में यह आंकड़ा बढ़कर 1,065 हो गया। वहीं मार्च में 1,707, अप्रैल में 1,045 और मई के महीने में रिकॉर्ड 1,560 नए मरीज सामने आए हैं।
वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुसार टायफायड की सटीक पहचान के लिए साल्मोनेला टाइफी के विरुद्ध एंटीबॉडी परीक्षण, ब्लड कल्चर और यूरिन टेस्ट बेहद जरूरी हैं। इस बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित रहने के लिए डॉक्टरों ने लोगों को हमेशा पानी उबालकर पीने और बाहर का खाना खाने से बचने की सख्त सलाह दी है।
Author: Ajay Mishra


