Delhi News: कैंसर दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में से एक है। इसमें भी ब्लड कैंसर यानी रक्त का कैंसर बेहद खतरनाक माना जाता है। दिल्ली के रोहिणी स्थित राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के हेमाटो-ऑन्कोलॉजी और बोन मेरो ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट डॉ. दिनेश भूरानी के मुताबिक, ब्लड कैंसर शरीर में बहुत चुपचाप बढ़ता है।
यह बीमारी अक्सर तब सामने आती है जब स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है। ब्लड कैंसर होने पर मुख्य रूप से हमारा खून और बोन मेरो प्रभावित होते हैं। इसका सीधा और घातक असर शरीर के इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। इस गंभीर बीमारी से बचने के लिए समय पर इसकी पहचान और सही इलाज बेहद जरूरी है।
ट्यूमर नहीं, सीधे खून पर होता है हमला
ब्लड कैंसर अन्य कैंसर से काफी अलग होता है क्योंकि इसमें शरीर के भीतर कोई ट्यूमर या गांठ नहीं बनती है। यह सीधे हमारी बोन मेरो को नुकसान पहुंचाता है, जिससे शरीर में हेल्दी ब्लड सेल्स बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। ब्लड कैंसर मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं जो लिम्फेटिक सिस्टम को प्रभावित करते हैं।
इसके पहले प्रकार ‘ल्यूकेमिया’ में रक्त और बोन मैरो प्रभावित होते हैं। दूसरा प्रकार ‘लिंफोमा’ है, जो हमारे इम्यून सिस्टम के महत्वपूर्ण हिस्से यानी लिम्फेटिक सिस्टम को नष्ट करता है। तीसरा प्रकार ‘मल्टीपल मायलोमा’ है, जो इंफेक्शन से लड़ने वाली एंटीबॉडी बनाने वाली कोशिकाओं को पूरी तरह खत्म कर देता है।
इन 6 शुरुआती लक्षणों को कभी न करें इग्नोर
रक्त कैंसर किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है। इसमें छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार, शरीर में दिखने वाले कुछ प्रमुख लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना इसका सबसे पहला और बड़ा लक्षण माना जाता है।
इसके अलावा बिना किसी वजह के बार-बार तेज बुखार आना या शरीर में संक्रमण होना भी खतरे की घंटी है। रात में सोते समय अचानक बहुत ज्यादा पसीना आना, बिना किसी चोट के शरीर पर नीले निशान पड़ना, गले या जांघों में सूजन होना और हड्डियों में तेज दर्द के साथ वजन कम होना इसके मुख्य लक्षण हैं।
इलाज की आधुनिक और हाई-टेक तकनीकें
मेडिकल साइंस अब इतना एडवांस हो चुका है कि हर मरीज के जेनेटिक प्रोफाइल के आधार पर ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ तैयार की जाती है। आजकल कीमोथेरेपी के अलावा भी कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। ‘टार्गेटेड थेरेपी’ की दवाएं सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं, जिससे शरीर के बाकी स्वस्थ सेल्स पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।
इसके अलावा ‘इम्यूनोथेरेपी’ तकनीक मरीज के अपने इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने के लिए मजबूत बनाती है। सबसे आधुनिक ‘कार-टी सेल थेरेपी’ जीन-इंजीनियरिंग के जरिए ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। ल्यूकेमिया के कई मामलों में ‘स्टेम सेल ट्रांसप्लांट’ ही आखिरी और सबसे जीवनरक्षक विकल्प बचता है।
Author: Asha Thakur


