कसौली की दवा कंपनी पर पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप, एनजीटी ने थमाया कड़ा नोटिस

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के कसौली में स्थित एक बड़ी दवा कंपनी मुश्किलों में घिर गई है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने पर्यावरण नियमों के उल्लंघन मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने इस औद्योगिक इकाई को सीधे नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

नई दिल्ली में एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने लेक सिंह द्वारा एमएस मोरेपन लैबोरेटरी लिमिटेड के खिलाफ दायर एक महत्वपूर्ण कानूनी आवेदन पर यह सख्त कदम उठाया है।

शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में दवा कंपनी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। कंपनी पर आरोप है कि वह अपने बड़े जेनरेटर सेटों और भारी औद्योगिक मशीनों को बिना रोक-टोक चला रही है। इससे आसपास के पूरे रिहायशी इलाके में निर्धारित सीमा से कहीं अधिक ध्वनि प्रदूषण हो रहा है।

प्रदूषित कचरा बहाने और सिंचाई का पानी चोरी करने का आरोप

याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने कंपनी की एक आधिकारिक ध्वनि निगरानी रिपोर्ट भी पेश की है। इसके अलावा दवा फैक्ट्री पर तय मानकों से ज्यादा खतरनाक औद्योगिक कचरा यानी अपशिष्ट बाहर निकालने का भी आरोप है। इससे कसौली की खूबसूरत वादियों का पर्यावरण बुरी तरह प्रदूषित हो रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों ने कंपनी पर खेती और सिंचाई के लिए आने वाले पानी का गलत तरीके से औद्योगिक इस्तेमाल करने का भी गंभीर आरोप लगाया है। इससे पहले पीड़ित पक्ष ने कसौली की सिविल कोर्ट में एक दीवानी मुकदमा संख्या 64/2023 भी दायर किया था।

हालांकि, सिविल जज की अदालत ने उस वक्त इस मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पर्यावरण से जुड़े ऐसे मामलों की सुनवाई का सही अधिकार सिर्फ राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के पास ही सुरक्षित है। इसके बाद पीड़ित ने एनजीटी का रुख किया।

अदालत ने चार हफ्ते में मांगा जवाब और तय की तारीख

एनजीटी ने सभी आरोपों को गंभीरता से लेते हुए दवा कंपनी और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिया है। अदालत में मौजूद कंपनी के वरिष्ठ वकील ने इस नोटिस को स्वीकार किया है। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

अदालत ने आवेदक को निर्देश दिया है कि वह अन्य सभी संबंधित पक्षों को इस कानूनी दस्तावेज की कॉपी उपलब्ध कराए। साथ ही अगली सुनवाई से कम से कम एक हफ्ते पहले कोर्ट में सेवा शपथपत्र दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।

Author: Sunita Gupta

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