Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला वाकया सामने आया है। यहां के दीन दयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल में बुधवार को एक मासूम बच्ची को नियमित टीका लगाया गया था। इसके महज तीन घंटे बाद ही संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी जान चली गई।
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में पूरी तरह हड़कंप मच गया है। आला अधिकारियों ने तुरंत मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। पीड़ित परिजनों ने डीडीयू अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
टीकाकरण के बाद अचानक बिगड़ी बच्ची की तबीयत
मृतक मासूम की पहचान संजौली की रहने वाली 45 दिन की बच्ची कियांशी के रूप में हुई है। बच्ची के दादा ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 11 बजे परिजन उसे रूटीन वैक्सीनेशन के लिए अस्पताल ले गए थे। वहां स्वास्थ्य स्टाफ ने बच्ची को जरूरी टीके लगाए और कुछ देर बाद घर भेज दिया।
दोपहर लगभग दो बजे घर पर बच्ची ने अचानक हिलना-डुलना बंद कर दिया और उसकी नाक से खून बहने लगा। परिजन घबराकर उसे तुरंत आईजीएमसी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने बच्ची को बचाने के लिए काफी देर तक सीपीआर दिया। हालांकि, तब तक उसका पूरा शरीर नीला पड़ चुका था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बिसरा जांच पर टिकी सच्चाई
आईजीएमसी के डॉक्टरों ने काफी कोशिशों के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद फोरेंसिक मेडिसिन विभाग ने शव का पोस्टमार्टम किया। शुरुआती जांच में सीधे तौर पर वैक्सीन के साइड इफेक्ट की बात सामने नहीं आई है। डॉक्टरों ने असली वजह जानने के लिए बिसरा सुरक्षित रख लिया है।
जांच टीम इस बिसरा सैंपल को स्टेट फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी जुन्गा भेज रही है। एफएसएल की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का खुलासा हो पाएगा। आमतौर पर 45 दिन के शिशुओं को पेंटावेलेंट, पोलियो और न्यूमोकोकल जैसी बेहद जरूरी जीवन रक्षक वैक्सीन और ड्राप दी जाती हैं।
इस भयानक हादसे से संजौली स्थित घर की खुशियां मातम में बदल गई हैं। मां क्षितिजा और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। आईजीएमसी मोर्चरी के बाहर का माहौल बेहद गमगीन नजर आया। एएसपी अभिषेक ने बताया कि पुलिस परिजनों के बयानों के आधार पर निष्पक्ष और कानूनी कार्रवाई कर रही है।
Author: Sunita Gupta


