Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने अवमानना के एक गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने शिक्षा सचिव कार्यालय के जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर और शिक्षा निदेशक के निजी सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब कर लिया है। अदालत ने इस लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई है।
हाई कोर्ट ने दोनों कर्मचारियों से मांगा लिखित स्पष्टीकरण
न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की एकल पीठ ने कर्मचारियों से पूछा कि उन्होंने किस अधिकार से अफसरों के पर्सनल लीगल नोटिस खुद रिसीव किए। कोर्ट ने दोनों बड़े प्रतिवादियों को व्यक्तिगत रूप से कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। इसके बावजूद स्टाफ ने इन आधिकारिक कागजातों को खुद ही प्राप्त कर लिया।
हाई कोर्ट ने अब शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक को फिर से नए फ्रेश नोटिस जारी किए हैं। माननीय अदालत ने पूछा है कि आदेशों का समय पर पालन न करने के लिए क्यों न उनके खिलाफ कानूनी एक्शन लिया जाए। इस लापरवाही ने पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है।
शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरा कानूनी विवाद अनिल कुमार और पांच अन्य टीजीटी शिक्षकों से जुड़ा हुआ है। इन पीड़ित शिक्षकों ने मुख्य अध्यापक के पद पर सीनियरिटी के आधार पर प्रमोशन पाने के लिए हाई कोर्ट के समक्ष एक मुख्य याचिका दाखिल की थी। इस पर कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया था।
हाई कोर्ट ने सतीश कुमार के पुराने मामले को आधार बनाकर राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेने के कड़े आदेश दिए थे। अदालत ने यह महत्वपूर्ण निर्णय 12 दिसंबर 2025 को पारित किया था। तय समय सीमा में इस सरकारी आदेश का पालन बिल्कुल नहीं हुआ।
आदेश का पालन न होने पर दायर हुई अवमानना याचिका
निर्धारित समय के भीतर जब शिक्षा विभाग ने कोई उचित कदम नहीं उठाया, तो प्रार्थी शिक्षक कोर्ट जाने को मजबूर हो गए। उन्होंने सीनियर अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज कराया। अदालत ने अब इस गंभीर मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 जून की तारीख तय की है।
Author: Sunita Gupta


