झारखंड पुलिस का खौफनाक सच: बेटी के हत्यारे से बिक गए 28 वर्दीवाले, हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ बड़ा एक्शन

Jharkhand News: झारखंड के बोकारो से बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां न्याय के रक्षक ही भक्षक बन गए। पिंड्राजोरा थाने के 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। इन पर छात्रा के अपहरण और हत्या के अभियुक्त से सांठगांठ का आरोप है। हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद यह कार्रवाई हुई। ज़िला पुलिस अधीक्षक ने पूरे थाने को लाइन हाजिर कर दिया है। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।

थाने के सभी पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

बोकारो के ज़िला पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने यह सख्त कदम उठाया है। उन्होंने एक साथ पूरे थाने के स्टाफ को सस्पेंड कर दिया। निलंबित होने वालों में दस सब-इंस्पेक्टर और पांच असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं। इनके अलावा दो हवलदार और ग्यारह सिपाहियों पर भी गाज गिरी है। इन सभी पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। जांच में पता चला कि पुलिसकर्मियों ने मुख्य अभियुक्त को बचाने की पूरी कोशिश की थी।

पुष्पा महतो के हत्यारे से मिलाई थी हाथ

यह पूरा मामला अठारह वर्षीय पुष्पा महतो की हत्या से जुड़ा है। पुष्पा आठ महीने पहले अचानक लापता हो गई थी। बाद में उसका अपहरण कर हत्या कर दी गई। आरोप है कि पिंड्राजोरा पुलिस ने मुख्य अभियुक्त दिनेश महतो से हाथ मिला लिया था। पुलिसकर्मियों ने हत्यारे से पैसे लिए और उसके साथ पार्टी भी की। इस सांठगांठ के कारण हत्या के मामले की जांच बहुत कमज़ोर हो गई थी। पुलिस ने सबूत मिटाने में भी मदद की थी।

हाईकोर्ट के दखल के बाद जागा पुलिस प्रशासन

पीड़ित परिवार कई महीनों तक थाने के चक्कर लगाता रहा। थाना प्रभारी से लेकर बड़े अधिकारियों तक किसी ने उनकी एक न सुनी। हारकर पीड़ित परिवार ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। हाईकोर्ट ने सत्ताईस फरवरी से लेकर तेईस मार्च तक कई बार पुलिस को फटकार लगाई। कोर्ट ने ज़िला पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार ठहराने की चेतावनी दी। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद पुलिस महानिदेशक ने तुरंत एक्शन लिया।

एसआईटी ने किया मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद डीजीपी तदाशा मिश्रा ने एक स्पेशल जांच टीम बनाई। इस एसआईटी का नेतृत्व डीएसपी आलोक रंजन को सौंपा गया। नई टीम ने दस अप्रैल को अपनी जांच शुरू की। अगले ही दिन ग्यारह अप्रैल की सुबह मुख्य अभियुक्त दिनेश महतो को गिरफ्तार कर लिया गया। दिनेश से सख्ती से पूछताछ की गई। उसकी निशानदेही पर एसआईटी ने कई अहम सबूत जुटाए। पुलिस की इस फुर्ती से परिजनों को थोड़ी राहत ज़रूर मिली है।

जंगल से बरामद हुआ पुष्पा का नरकंकाल

एसआईटी ने दिनेश महतो से हत्या के राज उगलवाए। पूछताछ के बाद ग्यारह अप्रैल की शाम को एक बड़ा खुलासा हुआ। एसआईटी की टीम पुष्पा महतो के कॉलेज से एक किलोमीटर दूर स्थित जंगल में पहुंची। वहां पुलिस को पुष्पा का कथित कंकाल बरामद हुआ। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि कंकाल का डीएनए टेस्ट करवाया जा रहा है। अभियुक्त दिनेश महतो के खिलाफ हत्या की धारा भी जोड़ दी गई है।

हत्यारे के घर से मिले कई अहम सुराग

नई जांच टीम ने बेहद पेशेवर तरीके से काम किया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हुआ चाकू भी बरामद कर लिया है। इसके अलावा घटना के वक्त पहने गए कपड़े भी ज़ब्त किए गए हैं। एसआईटी ने तेईस मोबाइल सिम और चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। ये सभी साक्ष्य केस को अदालत में मज़बूत बनाएंगे। पहले वाली पुलिस टीम ने इन सबूतों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया था। अब असली दोषियों को सज़ा मिलने की उम्मीद जागी है।

कॉलेज के लिए निकली और फिर नहीं लौटी

खुंटाडीह गांव की रहने वाली पुष्पा महतो इक्कीस जुलाई को कॉलेज गई थी। वह साइकिल से दस किलोमीटर दूर चास स्थित अपने कॉलेज के लिए निकली थी। शाम तक वह घर वापस नहीं लौटी। उसकी मां रेखा देवी खेतों में मज़दूरी करती हैं। घर लौटने पर मां ने बेटी को बहुत तलाशा। गांव की हर गली और मोहल्ले में पुष्पा को ढूंढा गया। जब कुछ पता नहीं चला तो मां रोते हुए पिंड्राजोरा थाने पहुंचीं।

पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में की आनाकानी

मां रेखा देवी ने पुलिस से बेटी को खोजने की मिन्नतें कीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें सिर्फ झूठा आश्वासन देकर घर भेज दिया। वह रोज़ थाने के चक्कर काटती रहीं। घटना के तीन दिन बाद चौबीस जुलाई को थाना प्रभारी ने सिर्फ एक डायरी एंट्री की। एफआईआर दर्ज करने में पुलिस लगातार कतराती रही। बहुत दबाव के बाद तेरह दिनों बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। वह भी अज्ञात लोगों के खिलाफ मानव तस्करी की धारा में दर्ज हुआ।

पहले ही दिन से दिनेश पर था पूरा शक

रेखा देवी ने शुरू से ही पड़ोसी दिनेश महतो पर अपना शक ज़ाहिर किया था। पुष्पा की शादी तय हो चुकी थी। इस बात से दिनेश उसे लगातार परेशान कर रहा था। इक्कीस जुलाई को पुष्पा के गायब होने पर रेखा देवी दिनेश के घर भी गई थीं। दिनेश वहां मौजूद नहीं था। इसी वजह से उनका शक यकीन में बदल गया। उन्होंने यह बात थानेदार को बताई थी। फिर भी पुलिस दिनेश को लगातार बचाती रही।

पीड़ित परिवार को डराने की हुई थी कोशिश

पीड़ित परिवार के वकील विंसेंट मार्की ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के कड़े रवैये के बाद पुलिस बौखला गई थी। परिवार को डराने के लिए पुलिस ने अनंत महतो के बुजुर्ग चाचा सम्पद महतो को निशाना बनाया। तीन अप्रैल को पुलिस उन्हें जबरन थाने ले गई। वहां उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई। यह सारी बात अदालत को बताई गई। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस अफसरों को तुरंत तलब कर लिया।

निलंबित पुलिसकर्मियों की सफाई और बहानेबाज़ी

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद निलंबित थाना प्रभारी अभिषेक रंजन खुद को निर्दोष बता रहे हैं। उनका कहना है कि अभियुक्त दिनेश महतो बेहद शातिर था। उसने पुलिस को बुरी तरह से गुमराह किया। पैसों के लेन-देन के आरोप को वह सिरे से नकार रहे हैं। वहीं निलंबित सिपाही धनंजय सिंह ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जांच में सिपाही की कोई भूमिका नहीं होती। फिर भी उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।

परिवार ने की सीबीआई जांच की मांग

पुष्पा के पिता अनंत महतो पुलिस की इस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। वह पूरे मामले की सीबीआई जांच चाहते हैं। उनका मानना है कि कुछ दिन बाद इन पुलिसकर्मियों का निलंबन रद्द हो जाएगा। इसके बाद ये लोग फिर से किसी बेकसूर को न्याय मिलने से रोकेंगे। अनंत महतो कहते हैं कि उनकी बेटी तो अब वापस नहीं आएगी। लेकिन वह अपनी बेटी के कातिल को फांसी के फंदे पर लटकते हुए देखना चाहते हैं।

इंसाफ की लड़ाई में छूट गई बेटे की पढ़ाई

इस दुखद घटना ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया है। पुष्पा के परिवार में अब माता-पिता और सोलह साल का भाई बचा है। बहन को इंसाफ दिलाने की लंबी लड़ाई में भाई की पढ़ाई छूट गई। सुरक्षा कारणों से परिवार ने बेटे को राजस्थान भेज दिया है। अनंत महतो जहां पहले मज़दूरी करते थे, अब वहां उनका बेटा काम कर रहा है। परिवार आज भी खौफ के साये में जीने को मजबूर है।

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