आसमान से बरसी आफत, मलबे में दबीं एमबीबीएस छात्रों की उम्मीदें; 28 जून को परीक्षा और सब कुछ तबाह

Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली के सैदुलाजाब इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने के बाद सैकड़ों मेडिकल छात्रों के भविष्य पर गहरा संकट मंडरा गया है। इस भयानक हादसे के समय बगल वाली इमारत की लाइब्रेरी में 150 से अधिक छात्र पूरी एकाग्रता के साथ अपनी पढ़ाई कर रहे थे।

अचानक हुए इस हादसे के बाद मलबे में छात्रों के बेहद जरूरी नोट्स, महंगे टैबलेट, लैपटॉप, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण किताबें फंस गई हैं। अब ये परेशान छात्र जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस से अपना कीमती सामान सुरक्षित बाहर निकलवाने के लिए लगातार गुहार लगा रहे हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जमींदोज हुई इमारत से सटी हुई दूसरी बिल्डिंग भी पूरी तरह से एक तरफ झुक चुकी है। इस जर्जर हो चुकी इमारत के किसी भी समय गिरने का बड़ा खतरा है। सुरक्षा कारणों से इस समय किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है।

हादसे के वक्त मची चीख-पुकार, जान बचाकर भागे छात्र

मूल रूप से असम की रहने वाली छात्रा अटलांटा भी सोमवार को अपना लैपटॉप, आईफोन, पर्स और जरूरी नोट्स लेने घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने साल 2019 में रूस से अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। वर्तमान में वह विदेशी मेडिकल स्नातकों की अनिवार्य एफएमजीई परीक्षा की तैयारी में जुटी हैं।

यह बेहद महत्वपूर्ण परीक्षा आगामी 28 जून को होनी तय हुई है। अटलांटा ने बताया कि जब हादसा हुआ, तब वह लाइब्रेरी में ही पढ़ रही थीं। जोरदार धमाके की आवाज सुनते ही चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए छात्र अपना सारा सामान वहीं छोड़कर बाहर की तरफ भागे।

लाइब्रेरी में फंसे अधिकांश छात्रों की पूरी पढ़ाई और परीक्षा की अध्ययन सामग्री इस समय उसी असुरक्षित इमारत के अंदर बंद है। फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स के अध्यक्ष डॉ. जशवंत सिंह यादव ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और छात्रों की समस्याओं को बेहद गंभीर बताया।

प्रशासन से सामूहिक पढ़ाई और सामान दिलाने की मांग

डॉ. जशवंत सिंह यादव ने बताया कि सैदुलाजाब क्षेत्र में एफएमजीई की तैयारी कराने वाले दो बड़े कोचिंग संस्थान संचालित हैं। इस पूरे इलाके में करीब 900 मेडिकल छात्र रहते हैं। परीक्षा सिर पर है और बिना लैपटॉप व नोट्स के पढ़ाई जारी रखना छात्रों के लिए नामुमकिन हो रहा है।

छात्रों के संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द लाइब्रेरी से छात्रों का सामान निकाला जाए। इसके साथ ही, इस मानसिक आघात से जूझ रहे छात्रों के लिए एक जगह बैठकर सामूहिक रूप से पढ़ने की वैकल्पिक व्यवस्था भी तुरंत सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इस संकट के बीच राहत की बात यह है कि मलबे को हटाने के दौरान रविवार की शाम को पुलिस को कुल 23 लैपटॉप सही-सलामत मिले हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इन बरामद लैपटॉप के असली मालिकों की पहचान की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।

Author: Gaurav Malhotra

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