मलबे के नीचे दबी हैं कई जिंदगी? सैदुलाजाब में 48 घंटे बाद भी रेस्क्यू जारी, मोबाइल लोकेशन से खुला राज

Delhi News: दिल्ली के सैदुलाजाब गांव में पांच मंजिला इमारत जमींदोज होने के 48 घंटे बाद भी राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। मलबे को पूरी तरह से हटाने में अभी 24 घंटे से अधिक का समय और लग सकता है। एनडीआरएफ, दमकल विभाग और दिल्ली पुलिस की टीमें संयुक्त रूप से मौके पर जुटी हैं।

मलबे को तेजी से हटाने के लिए मौके पर एक हाइड्रा क्रेन और दो बड़ी क्रेनें लगातार काम कर रही हैं। आपदा प्रबंधन की टीमों द्वारा अब तक करीब 55 ट्रक मलबा घटनास्थल से हटाया जा चुका है। शुरुआती चरण में बचाव दलों की प्राथमिकता कैंटीन के ऊपर गिरे मलबे को साफ करने की थी।

एनडीआरएफ के अधिकारियों ने बताया कि कैंटीन वाले हिस्से का मलबा पूरी तरह साफ कर दिया गया है। गनीमत यह है कि रविवार शाम के बाद से वहां मलबे में कोई भी व्यक्ति फंसा हुआ नहीं मिला है। फिलहाल घटना स्थल पर करीब 250 वर्ग गज क्षेत्र में भारी मलबा फैला हुआ है।

झुकी हुई जर्जर इमारत बनी बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती

सघन आबादी वाले इस इलाके में राहत कार्य के दौरान रेस्क्यू टीमों को कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हादसे के बाद बगल की एक अन्य बहुमंजिला इमारत पूरी तरह झुक गई है, जिसके अचानक गिरने की गंभीर आशंका बनी हुई है।

इस खतरे को देखते हुए प्रशासन ने झुकी हुई इमारत को हाइड्रोलिक जैक लगाकर अस्थाई सहारा दिया है। इसके साथ ही लोहे के अतिरिक्त गार्डर भी मंगवाए गए हैं, ताकि बचाव अभियान के दौरान आसपास की कमजोर संरचनाएं सुरक्षित रहें और कोई नया व दूसरा बड़ा हादसा न होने पाए।

घटनास्थल पर जगह बेहद कम होने के चलते एक साथ कई बड़ी क्रेनें काम नहीं कर पा रही हैं। इस वजह से मलबा हटाने की गति थोड़ी धीमी है। हालांकि, जैसे-जैसे मलबे के ढेर को साफ कर जगह बनाई जा रही है, वैसे-वैसे रेस्क्यू ऑपरेशन की रफ्तार में तेजी आ रही है।

अपनों की तलाश में भटक रहे लोग, मोबाइल लोकेशन से बढ़ी चिंता

शनिवार को ढही इस पांच मंजिला इमारत में कई व्यावसायिक कार्यालय संचालित होते थे। हालांकि वीकेंड की वजह से अधिकांश दफ्तर बंद थे, लेकिन कुछ कर्मचारियों का आना-जाना बना हुआ था। स्थानीय निवासियों का दावा है कि हादसे के वक्त इमारत के अंदर कई लोग मौजूद थे, जो लापता हैं।

फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जसवंत सिंह यादव ने बताया कि कई छात्र और कर्मचारी अभी भी लापता हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लापता लोगों के मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन इसी घटनास्थल की ही दिखाई दे रही है, जिससे उनके दबे होने की आशंका है।

रेस्क्यू टीमें इस बात का विशेष ध्यान रख रही हैं कि मलबा हटाने के दौरान वह नीचे की ओर न धंसे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि यदि मलबे के नीचे कोई भी व्यक्ति जीवित फंसा हो, तो उसकी सुरक्षा बनी रहे और उसे बिना किसी नुकसान के बाहर निकाला जा सके।

छात्रों के गढ़ सैदुलाजाब में पसरा सन्नाटा, दहशत में लोग

साकेत मेट्रो स्टेशन के नजदीक होने के कारण सैदुलाजाब गांव पिछले कुछ वर्षों में यूपीएससी, एसएससी और एफएमजीई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का एक बड़ा गढ़ बन चुका है। कम किराये पर पीजी और फ्लैट मिलने के कारण यहां हजारों छात्र रहते हैं।

इस हादसे ने पूरे इलाके की तस्वीर बदलकर रख दी है। जहां पहले चौबीसों घंटे छात्रों की चहल-पहल, लाइब्रेरी और कैफे गुलजार रहते थे, वहां अब पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों और छात्रों के बीच इस समय डर और गहरी चिंता का माहौल बना हुआ है।

Author: Gaurav Malhotra

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