Himachal Pradesh News: मंडी नगर निगम चुनाव के शुरुआती नतीजों ने भाजपा को बड़ी बढ़त दे दी है। अब तक घोषित वार्डों में भाजपा साफ आगे दिख रही है, जबकि कांग्रेस पीछे रह गई है। खलियार से निर्दलीय जीत ने मुकाबले को और रोचक बनाया। जयराम ठाकुर के गृह क्षेत्र में यह परिणाम राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में निकाय चुनावों के तहत मंडी नगर निगम के 14 वार्डों की मतगणना जारी है। सुबह से आए परिणामों में भाजपा ने कई वार्डों में जीत दर्ज की। कांग्रेस को नेला वार्ड से राहत मिली। वहीं, खलियार में कांग्रेस की बागी उम्मीदवार अलकनंदा हांडा ने जीतकर सभी समीकरण बदल दिए।
मंडी में भाजपा की बढ़त ने बढ़ाया सियासी संदेश
मंडी को पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का मजबूत प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। इसलिए नगर निगम के नतीजों पर प्रदेश भर की नजर थी। शुरुआती रुझानों में भाजपा की बढ़त ने पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाया। कांग्रेस के लिए यह परिणाम शहरी मतदाता तक पहुंच की चुनौती दिखा रहा है।
वार्ड नंबर एक खलियार से निर्दलीय अलकनंदा हांडा ने 719 वोट लेकर जीत दर्ज की। वह कांग्रेस की बागी उम्मीदवार बताई जा रही हैं। भाजपा के रणवीर सिंह दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार परवीन कुमार हार गए। परवीन पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के भतीजे हैं।
पुरानी मंडी वार्ड नंबर दो में मुकाबला बेहद करीबी रहा। यहां भाजपा की सरिता हांडा ने 631 वोट लेकर जीत हासिल की। उनकी जीत का अंतर सिर्फ 11 वोट बताया गया। इस सीट ने साफ कर दिया कि कई वार्डों में मुकाबला आखिरी राउंड तक कड़ा बना रहा।
भाजपा ने कई वार्डों में दर्ज की जीत
वार्ड नंबर तीन पड्डल से भाजपा के निर्मल वर्मा ने 687 वोट लेकर जीत दर्ज की। उन्होंने 119 वोटों के अंतर से मुकाबला अपने पक्ष में किया। वार्ड नंबर पांच मंगवाई से भाजपा की कृष्णा ठाकुर ने 789 वोट हासिल किए और 198 वोटों से जीत दर्ज की।
नेला वार्ड नंबर चार से कांग्रेस को एक बड़ी राहत मिली। यहां नर्वदा देवी ने 805 वोट हासिल किए और 123 वोटों से जीत दर्ज की। कांग्रेस के लिए यह जीत मनोबल बढ़ाने वाली रही। हालांकि बाकी शुरुआती परिणामों ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है।
वार्ड नंबर छह सनयार्ड से भाजपा के वीरेंद्र आर्य विजयी रहे। वार्ड नंबर सात तल्याहड़ से भाजपा के जितेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की। इन दोनों परिणामों ने भाजपा की बढ़त को और मजबूत किया। पार्टी ने स्थानीय मुद्दों और संगठन की सक्रियता को जीत का आधार बताया।
वार्ड नंबर आठ से भाजपा की गुरदीप कौर ने जीत हासिल की। वार्ड नंबर नौ पैलेस-2 से भाजपा उम्मीदवार सुमन ठाकुर विजयी रहीं। इन नतीजों के बाद भाजपा ने नगर निगम में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। कांग्रेस के लिए वापसी की राह लगातार कठिन दिखने लगी।
वार्ड नंबर दस सुहड़ा से भाजपा की नेहा कुमारी ने जीत दर्ज की। वार्ड नंबर बारह भगवान से भाजपा के गगन कश्यप विजयी रहे। इन परिणामों ने मंडी नगर निगम में भाजपा की बढ़त को निर्णायक दिशा दे दी। बाकी वार्डों के नतीजे अंतिम तस्वीर साफ करेंगे।
कांग्रेस के लिए टिकट और संगठन पर सवाल
मंडी के नतीजों ने कांग्रेस के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। खलियार में आधिकारिक उम्मीदवार की हार और बागी की जीत ने टिकट चयन पर बहस बढ़ा दी। नेला को छोड़कर शुरुआती वार्डों में कांग्रेस प्रभावी प्रदर्शन नहीं कर सकी। इससे स्थानीय संगठन की पकड़ पर भी चर्चा तेज हुई।
भाजपा के लिए यह नतीजे शहरी निकायों में ताकत दिखाने का मौका हैं। पार्टी मंडी को अपने राजनीतिक प्रभाव का केंद्र मानती रही है। ऐसे में नगर निगम की बढ़त को जयराम ठाकुर की पकड़ से भी जोड़ा जा रहा है। भाजपा इस परिणाम को कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनमत बता सकती है।
मंडी नगर निगम के चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़े गए। इसलिए यह मुकाबला केवल वार्ड स्तर का चुनाव नहीं रहा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इसे प्रतिष्ठा से जोड़ा। नगर निगम का परिणाम अब प्रदेश की शहरी राजनीति और आगामी चुनावी रणनीति पर असर डाल सकता है।
मतगणना केंद्रों पर प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं। ईवीएम से गिनती होने के कारण नगर निगम के नतीजे तेजी से सामने आ रहे हैं। प्रत्याशियों, एजेंटों और अधिकारियों की मौजूदगी में गिनती हो रही है। हर वार्ड का परिणाम राजनीतिक दलों के लिए अहम संदेश लेकर आ रहा है।
मंडी के साथ हिमाचल के अन्य नगर निगमों के परिणाम भी आज घोषित हो रहे हैं। सोलन, धर्मशाला और पालमपुर के नतीजों पर भी भाजपा और कांग्रेस की नजर है। इन चुनावों से शहरी मतदाता का रुख समझने में मदद मिलेगी और दोनों दल आगे की रणनीति तय करेंगे।
मंडी में अब तक आए परिणामों ने भाजपा को मजबूत स्थिति में ला दिया है। कांग्रेस को नेला में जीत मिली, लेकिन कई वार्डों में पार्टी पिछड़ गई। निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने यह भी दिखाया कि स्थानीय चेहरे और वार्ड स्तर की नाराजगी चुनावी गणित बदल सकती है।
Author: Sunita Gupta


