Business News: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी दल अगले महीने भारत आ सकता है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत लगातार जारी है।
इस बड़े द्विपक्षीय समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय अधिकारियों ने अप्रैल में वॉशिंगटन डीसी का दौरा किया था। वहां अमेरिकी समकक्षों के साथ आमने-सामने की बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इस समझौते से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ नहीं आएगा वार्ताकार दल
जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से पूछा गया कि क्या अमेरिका के मुख्य वार्ताकार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भारत आएंगे? तो उन्होंने स्पष्ट जवाब दिया। गोयल ने कहा कि मुख्य वार्ताकार उनके साथ नहीं आ रहे हैं, लेकिन उनकी अगले महीने भारत आने की एक ठोस योजना है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 23 मई से भारत की अपनी चार दिवसीय यात्रा पर आ रहे हैं। इस महत्वपूर्ण यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है। रुबियो की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा होने जा रही है।
अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त शुल्क पर परामर्श जारी
भारत और अमेरिका ने सात फरवरी को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया था। हालांकि, इसके बाद अमेरिका ने व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत सभी आयात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया। इसके अलावा प्रमुख निर्यातकों के खिलाफ दो जांच भी शुरू की गईं।
धारा 301 के तहत शुरू की गई इस जांच का मुख्य कारण अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और श्रम मानक हैं। भारत सरकार ने इन दोनों जांचों पर अपना विस्तृत जवाब अमेरिकी प्रशासन को सौंप दिया है। इस समय दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर लगातार परामर्श जारी है।
अमेरिकी कंपनियों से मिला 60 अरब डॉलर से अधिक का निवेश
पीयूष गोयल ने एक विशेष कार्यक्रम में कहा कि कई बड़ी अमेरिकी कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश की घोषणा की है। भारत आज पूरी दुनिया के लिए सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य बन चुका है। पिछले छह महीनों में अमेरिकी उद्योगों से भारत को 60 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की निवेश प्रतिबद्धताएं मिली हैं।
अमेजन और गूगल जैसी दिग्गज टेक कंपनियां भारत में बड़े डेटा केंद्र स्थापित करने के लिए भारी निवेश कर रही हैं। मंत्री गोयल ने कहा कि अमेरिका और भारत स्वाभाविक साझेदार की तरह काम कर रहे हैं। दोनों देश कई आधुनिक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक-दूसरे के पूरक बनकर उभर रहे हैं।
इन आधुनिक तकनीकों पर साथ मिलकर काम करेंगे दोनों देश
वाणिज्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत को नई प्रौद्योगिकी, नवाचार, उच्च-सटीक रक्षा और डिजिटल डेटा केंद्र जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहिए। इसके अलावा क्वांटम कंप्यूटिंग उपकरण और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के लिए सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग, बढ़ती आय और मजबूत अर्थव्यवस्था के माध्यम से अमेरिकी नवाचार को एक बड़ा विस्तार मिल सकता है। वैश्विक संकट और उथल-पुथल के इस दौर में भारत और अमेरिका के पास अधिक विश्वसनीय तथा मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने का यह सबसे उपयुक्त अवसर है।
एमएसएमई इकाइयों को सात दिन के भीतर भुगतान करने का सुझाव
देश की परीक्षण सुविधाओं पर बात करते हुए गोयल ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी आधुनिक उपकरण स्थापित करने में उद्योग की पूरी मदद कर रहे हैं। उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी कंपनियों को एक खास सुझाव भी दिया।
उन्होंने कहा कि भारत में कार्यरत अमेरिकी कंपनियां वस्तुओं की स्वीकृति के सात दिन के भीतर लघु इकाइयों को भुगतान करने पर विचार करें। इससे नकदी प्रवाह बहुत तेज होगा, जिससे एमएसएमई अपने व्यवसाय पर बेहतर ध्यान दे सकेंगी। समय से पहले भुगतान मिलने से भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
Author: Rajesh Kumar

