Uttar Pradesh News: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली एक महत्वपूर्ण याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह विवाद पंद्रह जनवरी दो हजार पच्चीस को दिए गए उनके एक चर्चित बयान से जुड़ा था। हाईकोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद कांग्रेस सांसद पर लटक रही कानूनी कार्रवाई की तलवार अब पूरी तरह से हट गई है।
बयान पर मचा था भारी सियासी और कानूनी बवाल
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पंद्रह जनवरी को एक जनसभा में काफी तीखा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि हम बीजेपी, आरएसएस और खुद भारतीय राज्य व्यवस्था से लड़ रहे हैं। उनके इस बयान पर देश में भारी सियासी बवाल मच गया था। एक याचिकाकर्ता ने इस बयान को सीधे राज्य के खिलाफ बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। याचिका में पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने की मांग की गई थी।
एकल पीठ ने फैसला सुरक्षित रखकर दी बड़ी राहत
यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ के सामने मुख्य सुनवाई के लिए आया था। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आठ अप्रैल दो हजार छब्बीस को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद शुक्रवार एक मई को अदालत ने अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया। न्यायाधीश ने मामले की पूरी सच्चाई परखते हुए उस विवादित याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत के इस निष्पक्ष फैसले से कांग्रेसी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई है।
मुकदमे का टला खतरा, संसद में गूंजेगी विपक्ष की आवाज
रायबरेली के सांसद के लिए यह कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर एक बड़ी जीत मानी जा रही है। अगर अदालत इस याचिका को मंजूर कर लेती तो उन पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो जाता। इसके बाद उन्हें कानूनी उलझनों का सीधा सामना करना पड़ता। अब इस अनुकूल फैसले से उन पर पुलिस कार्रवाई का भारी खतरा टल गया है। राहुल गांधी अब बिना किसी मानसिक दबाव के संसद में विपक्ष की मजबूत आवाज बेखौफ होकर उठा सकेंगे।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हुई जीत, कांग्रेसियों ने ली राहत की सांस
इस विवाद के दौरान कांग्रेस ने शुरू से ही इसे एक बड़ा राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था। वहीं सत्ता पक्ष के समर्थकों ने इसे देशद्रोह जैसा गंभीर आरोप बताया था। हाईकोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रिया को बहुत अच्छे से संतुलित किया है। अब यह पूरा कानूनी मामला हमेशा के लिए बंद माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक बयानबाजी का दौर आगे भी सड़क से लेकर संसद तक लगातार जारी रहने की पूरी उम्मीद है।


