UP News: नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग पर हुआ हिंसक प्रदर्शन कोई आम घटना नहीं थी। पुलिस जांच में एक बहुत बड़ी और खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। इस पूरी हिंसा का मुख्य मास्टरमाइंड जमशेदपुर एनआईटी का एक पूर्व छात्र आदित्य आनंद निकला है। इसके साथ ही इस दंगे के तार सीधे पाकिस्तान से भी जुड़ गए हैं। पाकिस्तान से संचालित कुछ ट्विटर अकाउंट्स के जरिए भीड़ को भड़काया गया। पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को पकड़ा है।
इंजीनियर ने रची नोएडा में दंगे की साजिश
नोएडा के होजियरी कॉम्प्लेक्स में सोमवार को मजदूरों ने जमकर बवाल काटा। उन्होंने सड़कों पर पत्थरबाजी की और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। पुलिस की सख्त जांच में खुलासा हुआ कि यह विरोध प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ था। हजारीबाग का रहने वाला इंजीनियर आदित्य आनंद इस पूरी साजिश का मुख्य कर्ताधर्ता है। उसने बीटेक की पढ़ाई की है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है, लेकिन वह अभी भी फरार चल रहा है।
दो आरोपियों की गिरफ्तारी और पुराना रिकॉर्ड
आदित्य आनंद के साथ बिहार का ऑटो चालक रूपेश रॉय और मनीषा चौहान भी साजिश में शामिल थे। नोएडा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ग्यारह अप्रैल को रूपेश और मनीषा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आदित्य साल दो हजार बीस से ही देश में अशांति फैला रहा है। दिल्ली में हुए सीएए और एनआरसी विरोध प्रदर्शनों में भी इन आरोपियों की सक्रिय भूमिका सामने आई थी। ये लोग आदतन ऐसे दंगे भड़काने का काम लगातार करते हैं।
क्यूआर कोड से व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उकसाया
दंगे की यह पूरी योजना बहुत ही शातिराना तरीके से बनाई गई थी। तीनों आरोपी इकतीस मार्च और एक अप्रैल को ही नोएडा पहुंच गए थे। इसके बाद उन्होंने नौ और दस अप्रैल को मजदूरों से क्यूआर कोड स्कैन करवाए। इसके जरिए कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए और हजारों मजदूरों को उनसे जोड़ा गया। इन्हीं ग्रुप्स का इस्तेमाल करके भोली-भाली भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया गया। सोशल मीडिया का यह दुरुपयोग दंगे का मुख्य हथियार साबित हुआ।
ट्विटर पर पाकिस्तान से फैलाई गई झूठी खबरें
नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इस मामले में अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हिंसा के दौरान अनुषी तिवारी और मीर इलियास नाम के ट्विटर हैंडल से फर्जी खबरें फैलाई गईं। मजदूरों की मौत की झूठी अफवाहें उड़ाई गईं। साइबर पुलिस की जांच में यह साफ हो गया है कि ये दोनों अकाउंट पाकिस्तान से चलाए जा रहे थे। इनका सीधा मकसद भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में अशांति पैदा करना और देश का माहौल खराब करना था।


