पटना में ‘ब्लैकआउट’ के दौरान खूनी खेल: सुरक्षा परखने के लिए बंद की गई थीं लाइटें, अपराधियों ने कारोबारी को उतारा मौत के घाट

Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में कानून-व्यवस्था को लेकर किए जा रहे एक सुरक्षा अभ्यास (मॉक ड्रिल) के दौरान दिल दहला देने वाली वारदात हुई है। सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में प्रशासन द्वारा आयोजित ‘ब्लैकआउट मॉक ड्रिल’ के दौरान अपराधियों ने एक मसाला कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी। अपराधियों ने सुरक्षा के लिए किए गए अंधेरे का ढाल के रूप में इस्तेमाल किया। इस घटना ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की मुस्तैदी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंधेरे का फायदा उठाकर कारोबारी के सिर में मारी गोली

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले 25 वर्षीय मसाला कारोबारी पिंटू उर्फ बड़का अपराधियों के निशाने पर थे। जिस समय सुरक्षा अभ्यास के तहत पूरे इलाके की बिजली गुल थी, तभी घात लगाए हमलावरों ने पिंटू के सिर में गोली दाग दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सन्नाटे और अंधेरे के बीच अचानक हुई फायरिंग से पूरे बाजार क्षेत्र में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने लगे, जिससे इलाके में भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही कारोबारी ने तोड़ा दम

स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए खून से लथपथ पिंटू को तुरंत पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) पहुंचाया। हालांकि, सिर में गंभीर चोट लगने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही सुल्तानगंज पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और चश्मदीदों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कारोबारी की मौत से उनके परिजनों में कोहराम मच गया है और बाजार के अन्य व्यापारी भी डरे हुए हैं।

पुरानी रंजिश या सोची-समझी साजिश? जांच में जुटी एफएसएल

पुलिस की शुरुआती जांच इस मामले को पुरानी रंजिश से जोड़कर देख रही है। पुलिस को शक है कि अपराधियों को मॉक ड्रिल के समय की सटीक जानकारी थी। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को बुलाया गया है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने मौके से कई महत्वपूर्ण नमूने लिए हैं। पुलिस का मानना है कि पेशेवर अपराधियों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया है। हालांकि, अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी या पहचान उजागर नहीं हो पाई है।

प्रशासनिक विफलता और मॉक ड्रिल की टाइमिंग पर तीखे सवाल

इस सनसनीखेज वारदात ने मॉक ड्रिल के उद्देश्य और सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस समय पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को परखने का दावा कर रही थी, उसी समय अपराधी वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। लोगों ने प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी जताई है। व्यापारियों ने सुरक्षा की जिम्मेदारी तय करने और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की जरूरत है।

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