Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एक महिला के खिलाफ गलत गिरफ्तारी वारंट जारी करने पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने शिमला के सहायक रजिस्ट्रार को कानून का पाठ पढ़ाने का आदेश दिया है। अदालत ने अफसर को अपनी कानूनी समझ सुधारने के लिए दो दिन की ट्रेनिंग लेने के निर्देश दिए हैं। जज ने स्पष्ट किया कि अधिकारी से कानून की सही जानकारी रखने की उम्मीद रहती है।
अफसर ने बिना सोचे समझे जारी किया फरमान
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने इस अहम मामले की सुनवाई की। उन्होंने पाया कि सहायक रजिस्ट्रार बुद्धि राम ने बिना सोचे-समझे महिला के खिलाफ वारंट निकाला। यह कदम पूरी तरह कानूनी नियमों के खिलाफ था। अदालत ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर न्यायिक अकादमी में ट्रेनिंग लेने को कहा है। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि इस आदेश का असर अधिकारी की गोपनीय रिपोर्ट पर नहीं पड़ेगा। इसका मकसद सिर्फ कार्यक्षमता बढ़ाना है।
क्या कहता है कानून का कड़ा नियम?
अदालत ने आदेश में भू-राजस्व अधिनियम 1954 का हवाला दिया। कानून की धारा 75-ए के तहत किसी महिला, नाबालिग या मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। अफसर ने नियम को दरकिनार करते हुए ढली थाना प्रभारी को वारंट लागू करने का आदेश दिया था। यह फरमान 13 अप्रैल 2026 तक लागू होना था। लेकिन हाईकोर्ट ने 13 मार्च 2026 को जारी इस वारंट को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
विधवा महिला ने अदालत में बताई अपनी पीड़ा
पीड़ित याचिकाकर्ता महिला ने अदालत के सामने अपनी व्यथा रखी। महिला ने बताया कि उनके पति प्रेम सिंह ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड से लोन लिया था। दुर्भाग्य से 8 अगस्त 2019 को उनके पति का निधन हो गया। महिला को पति से कोई भी चल या अचल संपत्ति विरासत में नहीं मिली है। वह सिर्फ विधवा पेंशन के सहारे अपना जीवन गुजार रही हैं। इसके बावजूद वह बैंक के साथ मिलकर इस मामले का समाधान करना चाहती हैं।


