US News: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विवादों में घिर गए हैं। ईरान के साथ जारी तनाव के बीच ट्रंप ने धमकियां दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया है। इस कारण अमेरिकी लोकतंत्र और वैश्विक शांति पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे को तबाह करने की चेतावनी दी है। उनके इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी नेता उन्हें मानसिक रूप से अस्थिर बता रहे हैं।
संविधान के 25वें संशोधन की उठी मांग
ट्रंप के रवैये पर डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। सीनेट सदस्य चक शूमर ने इस बयान को बकवास बताया है। बर्नी सैंडर्स ने कांग्रेस से मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है। सीनेटर क्रिस मर्फी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए संविधान के पच्चीसवें संशोधन पर विचार करने की बात कही है। उनका मानना है कि ट्रंप के ऐसे आक्रामक फैसले पूरे देश को बहुत भारी विनाश की तरफ धकेल सकते हैं।
तेल की कीमतों और महंगाई से मचा हाहाकार
राष्ट्रपति की धमकियों का सीधा असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ा है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है। फरवरी से चल रहे युद्ध के कारण यह रास्ता लगभग बंद हो चुका है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुकी हैं। अमेरिका के अंदर भी महंगाई बहुत तेजी से बढ़ रही है। आम लोगों के लिए जरूरी सामान खरीदना अब काफी मुश्किल होता जा रहा है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए डेथ वारंट
अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति की नीतियों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि ट्रंप की खतरनाक धमकियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए ‘डेथ वारंट’ बन सकती हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने नाटो सहयोगियों को गठबंधन छोड़ने की खुली धमकी दी है। इस कदम से अमेरिकी निवेशकों के बीच भारी डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है। विदेशी बाजारों के साथ ही घरेलू शेयर बाजार में भी भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
विपक्ष का आरोप: बिना रणनीति के चल रहा देश
विपक्षी दलों का सीधा आरोप है कि राष्ट्रपति बिना किसी ठोस रणनीति के काम कर रहे हैं। वे केवल अपशब्दों और खोखली धमकियों के सहारे सत्ता चलाना चाहते हैं। यह रवैया अमेरिका के पुराने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को भी डरा रहा है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिकी कांग्रेस में एक अहम बहस शुरू हो चुकी है। सांसद इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या राष्ट्रपति के युद्ध घोषित करने की शक्तियों पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।


