जबलपुर दीक्षांत समारोह: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने युवाओं को दिया आधुनिकता और परंपरा का महामंत्र

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Jabalpur News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को युवाओं से अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की पवित्रता बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और समृद्ध परंपरा के समन्वय से ही देश का संतुलित विकास संभव हो सकता है। राष्ट्रपति जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं।

दीक्षांत समारोह के मंच से राष्ट्रपति ने गोंडवाना साम्राज्य की शासक रानी दुर्गावती को याद किया। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती त्याग, कड़े परिश्रम और सर्वोच्च बलिदान की प्रतिमूर्ति थीं। वे आज भी हमारी संपूर्ण नारी शक्ति के लिए प्रेरणा का एक महान और जीवंत प्रतीक हैं। उनके नाम पर शैक्षणिक संस्थान का होना गर्व की बात है।

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राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि विकास की दौड़ में जो लोग पीछे छूट गए हैं, उन्हें आगे लाना जरूरी है। वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से अपेक्षा की कि वे जनजातीय समाज के लोगों में कौशल और ज्ञान को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर बड़े प्रयास करें।

आधुनिकता के साथ भारतीय संस्कृति का तालमेल जरूरी

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आधुनिकता के साथ-साथ विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति के प्रति गहरा भाव भी विकसित होना चाहिए। उन्होंने समारोह में स्वर्ण पदक जीतने वाले छात्रों में बेटियों की संख्या अधिक होने पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की और इसे देश के सर्वांगीण विकास का संकेत बताया।

राष्ट्रपति ने युवाओं को देश का असली भाग्य विधाता बताते हुए कहा कि भारत में युवाओं की आबादी लगभग 65 प्रतिशत है। युवाओं में कुछ भी कर गुजरने का अदम्य साहस होता है। देशवासियों को उनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं। इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें रोजगार के नए अवसर दे रही हैं।

बदलते वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज पूरी दुनिया में वेशभूषा, रहन-सहन और जीवनशैली तेजी से बदल रही है। इस बदलाव के बीच हमें अपने उन सनातन मूल्यों को कभी नहीं भूलना चाहिए, जो हमें कठिन समय में भी सदैव आंतरिक शक्ति और सही दिशा प्रदान करते हैं।

सत्य, अहिंसा और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा जैसे मानवीय मूल्यों को अपने जीवन का मजबूत आधार बनाएं। ये मूल्य मानव चेतना का मूल हिस्सा हैं। इनकी मदद से युवा कठिन से कठिन परिस्थितियों का डटकर सामना कर सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आपके अर्जित ज्ञान से ही आने वाले समय में विकसित भारत का सपना साकार होगा। युवा अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करें। ग्रामीण समुदायों की जमीनी समस्याओं को समझें और उन्हें सशक्त बनाकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

समारोह के समापन पर राष्ट्रपति ने युवाओं से पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाने की भावुक अपील की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण हर नागरिक की जीवन-यात्रा का एक अनिवार्य और अभिन्न हिस्सा होना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रह सकें।

Vijay Chouhan

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