Moradabad News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों का नामी निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के नाम पर एक-एक लाख रुपये की भारी घूस ली गई।
पुलिस की अब तक की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि तत्कालीन जिला समन्वयक (डीसी) अमित कुमार सिंह ने न सिर्फ दाखिले के नाम पर वसूली की, बल्कि सरकार से मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति अनुदान राशि में से भी रिश्वत की मांग की थी।
इस महाघोटाले के उजागर होने के बाद पुलिस अब उन पीड़ित गरीब बच्चों के अभिभावकों तक पहुंच गई है, जिनसे प्रवेश के नाम पर मोटी रकम ऐंठी गई थी। आरोपी डीसी अब विभागीय जांच के साथ-साथ पुलिस की कानूनी कार्रवाई में भी पूरी तरह फंस गए हैं।
बालिका विद्यालयों में कर दिया लड़कों का आवंटन, नियमों की उड़ी धज्जियां
यह पूरा मामला तब खुला जब 15 मई को आरटीई के अंतर्गत निजी स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों की जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूलों के प्रबंधकों ने डीसी की कारगुजारियों की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में बताया गया कि स्कूलों में सीटों की मैपिंग के दौरान यू-डायस पोर्टल पर तय मानक के अनुसार 25 प्रतिशत सीटें आवंटित नहीं की गईं। नियमों को ताक पर रखकर कई स्कूलों में क्षमता से अधिक सीटें आवंटित कर दी गईं, जिससे अव्यवस्था फैल गई।
हद तो तब हो गई जब भ्रष्टाचार के चलते पूरी तरह से बालिका विद्यालयों (गर्ल्स स्कूल्स) में लड़कों की सीटों का आवंटन कर दिया गया। स्कूल प्रबंधकों ने साफ आरोप लगाया कि डीसी अमित कुमार सिंह ने रिश्वत लेकर मनमाने तरीके से सीटों का सत्यापन किया था।
रिश्वत नहीं मिली तो वापस करा दिए 4 करोड़ रुपये, डीएम ने दिए सख्त आदेश
जांच में सामने आया कि आरटीई के तहत जिन गरीब बच्चों का दाखिला होता है, उन्हें सरकार की तरफ से फीस प्रतिपूर्ति के रूप में पांच-पांच हजार रुपये मिलते हैं। यह राशि सीधे अभिभावकों के खातों में जाती है। डीसी ने इस राशि को जारी करने के बदले भी घूस मांगी थी।
जब गरीब अभिभावकों ने रिश्वत देने से मना कर दिया, तो आरोपी डीसी ने मुरादाबाद जिले के लिए स्वीकृत करीब चार करोड़ रुपये की सरकारी ग्रांट को वापस शासन को भेज दिया था। अब वर्तमान जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने इस राशि को दोबारा मंगाने के लिए शासन को पत्र लिखा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने आरोपी के खिलाफ तत्काल एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज कराने के सख्त आदेश दिए। इसके बाद मूंढापांडे थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। सीओ वरुण कुमार ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है।
Author: Ajay Mishra


