Business: भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में पेमेंट सिस्टम को चौबीसों घंटे चालू रखकर डिजिटल बैंकिंग की पूरी तस्वीर बदल दी है। अब लोग आरटीजीएस के जरिए आधी रात को भी बड़े से बड़ा ट्रांजैक्शन तुरंत कर सकते हैं। हालांकि इसके कुछ जरूरी नियमों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।
नियमों की सही जानकारी रखकर आप ट्रांजैक्शन फेल होने या देरी जैसी गंभीर दिक्कतों से आसानी से बच सकते हैं। वहीं एनईएफटी आधे-आधे घंटे के बैच में काम करता है, लेकिन यह भी बेहद भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। इन दोनों का फर्क समझकर आप सही तरीका चुन सकते हैं।
जानिए रात के समय मनी ट्रांसफर के लिए कौन सा विकल्प है सबसे बेहतर
रात में पैसे भेजते समय ट्रांजैक्शन लिमिट का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। आरटीजीएस के लिए कम से कम दो लाख रुपये की न्यूनतम लिमिट तय की गई है। अगर रकम इससे कम है, तो आपके लिए एनईएफटी या आईएमपीएस का उपयोग करना ही सबसे बेहतर विकल्प रहेगा।
डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए अब ज्यादातर बड़े बैंक ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लेते हैं। इससे आम ग्राहकों और छोटे-बड़े कारोबारियों की बहुत अच्छी बचत होती है। स्पीड और सुरक्षा का यह नया तालमेल पर्सनल फाइनेंस को और बेहतर बनाता है।
एनईएफटी, आरटीजीएस और आईएमपीएस में अंतर की पूरी तालिका
लेनदेन को आसान बनाने के लिए इन तीनों प्रमुख सुविधाओं की तुलना जानना बहुत जरूरी है। एनईएफटी के लिए न्यूनतम सीमा एक रुपया है और इसका सेटलमेंट बैच के अनुसार होता है। यह चौबीसों घंटे उपलब्ध रहता है और छोटे लेनदेन के लिए सबसे उपयुक्त माध्यम है।
दूसरी तरफ आरटीजीएस में न्यूनतम सीमा दो लाख रुपये तय की गई है। इसका सेटलमेंट रियल-टाइम में तुरंत होता है और यह भी हमेशा उपलब्ध रहता है। वहीं आईएमपीएस में न्यूनतम सीमा एक रुपया है, जिसका सेटलमेंट तुरंत होता है और यह चौबीसों घंटे काम करता है।
चौबीसों घंटे फंड ट्रांसफर के दौरान होने वाली ये आम गलतियां सुधारें
डिजिटल ट्रांसफर की सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध है, लेकिन एक छोटी सी तकनीकी गलती आपका पेमेंट रोक सकती है। गलत आईएफएससी कोड डालने पर ट्रांजैक्शन तुरंत रिवर्स हो जाता है। इसके अलावा रिसीवर का नाम और अकाउंट नंबर भेजने से पहले दोबारा जरूर चेक कर लें।
बैंक हमेशा खाते के नाम के मुकाबले अकाउंट नंबर को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। सुरक्षा के लिहाज से अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बैंक से हमेशा लिंक रखें ताकि समय पर ओटीपी अलर्ट मिल सके। ये सुरक्षा लेयर्स रात के समय आपके पैसों को पूरी तरह से सुरक्षित रखती हैं।
धोखाधड़ी से बचने के लिए क्या है नए बेनेफिशियरी का कूलिंग-ऑफ पीरियड
सभी बैंक अक्सर वर्किंग ऑवर्स के बाद जोड़े गए नए बेनेफिशियरी के लिए ट्रांजैक्शन की लिमिट बहुत कम रखते हैं। यह ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए बनाया गया एक बेहतरीन सुरक्षा उपाय है। इससे बैंक स्टाफ की गैर-मौजूदगी में कोई बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी नहीं हो पाती है।
आमतौर पर नया पेई जोड़ने के बाद चौबीस घंटे का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ नियम लागू होता है। अगर आप किसी बड़े पेमेंट की प्लानिंग पहले से ही कर लें, तो आखिरी वक्त की हड़बड़ी से बच सकते हैं। इन नियमों को समझकर आप बेफिक्र होकर कभी भी सुरक्षित लेनदेन कर सकते हैं।
Rajesh Kumar

