Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को राज्यव्यापी हड़ताल कर दी। सीटू से संबंधित यूनियन के बैनर तले वर्कर्स ने टालेंड से सचिवालय तक विशाल रोष रैली निकाली। इस विरोध प्रदर्शन के कारण राज्य के सरकारी स्कूलों में दोपहर का भोजन नहीं पक सका और अध्यापकों ने अपने स्तर पर बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की।
वर्कर यूनियन ने सरकारों पर लगाया गंभीर शोषण का आरोप
यूनियन के पदाधिकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार पर वर्कर्स के आर्थिक शोषण का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने पिछले 17 वर्षों में उनके मानदेय में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की है। राज्य सरकार का रवैया भी इस संवेदनशील मामले पर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
तीन महीने की सैलरी पेंडिंग और छुट्टियां भी नहीं
मिड-डे मील वर्कर्स को सालभर काम करने के बाद भी एक भी पेड लीव यानी छुट्टी नहीं मिलती है। वर्कर्स को पिछले तीन-तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है और जो भुगतान होता है, वह भी टुकड़ों में आता है। इसके अलावा विभाग साल में तीन बार होने वाले अनिवार्य मेडिकल चेकअप का खर्च भी नहीं उठाता है।
हरियाणा की तर्ज पर सात हजार रुपये वेतन की मांग
वर्कर यूनियन ने मांग की है कि हिमाचल हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार उन्हें 12 महीने का पूरा वेतन दिया जाए। वे हरियाणा राज्य की तर्ज पर न्यूनतम 7000 रुपये मासिक मानदेय की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरह छुट्टियां, ग्रेच्युटी-पेंशन लाभ और मेडिकल खर्च सरकारी स्तर पर वहन करने की मांग शामिल है।
मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों में 25 बच्चों से कम संख्या होने पर वर्कर्स को नौकरी से निकालने की शर्त तुरंत हटाई जाए। कर्मचारियों को रेगुलर करने के लिए एक स्थाई पॉलिसी बनाई जाए। यदि सरकार ने इन जायज मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

