दिग्विजय सिंह के राज्यसभा चुनाव लड़ने से इनकार के बाद मचा घमासान, जानिए आखिर क्यों बदले कांग्रेस के समीकरण?

Bhopal News: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन महत्वपूर्ण सीटों के लिए चुनावी बिगुल पूरी तरह से बज चुका है। इसके साथ ही सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अपनी नई राजनीतिक रणनीतियों को अंतिम रूप देने में बेहद मुस्तैद हो चुके हैं।

इस बार राज्यसभा की तीसरी सीट पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज राजनेता दिग्विजय सिंह के अचानक चुनाव लड़ने से मना करने के बाद देश भर में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन चुकी है। इस हॉट सीट को लेकर फिलहाल कांग्रेस के अंदरूनी खेमे में भारी घमासान चल रहा है।

कांग्रेस ने मुझे जीवन में बहुत कुछ दिया है

अपनी पारंपरिक राज्यसभा सीट छोड़ने के फैसले पर अब खुद दिग्विजय सिंह का एक बेहद भावुक और बड़ा बयान सामने आया है। दिग्गज नेता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें उनके लंबे राजनीतिक जीवन में पांच बार विधानसभा भेजा है, जिससे उनका कद काफी बढ़ा है।

उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने उन्हें दो बार राज्य का मुख्यमंत्री बनाया है। इसके अलावा वे दो बार लोकसभा सदस्य और दो बार राज्यसभा सांसद के तौर पर देश की सेवा कर चुके हैं। इसलिए अब पार्टी के नए और युवा चेहरों को आगे आने का मौका मिलना चाहिए।

मीनाक्षी नटराजन को दमखम के साथ चुनाव जिताएंगे

दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि संगठन ने उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा दिया है। अब वे सभी पार्टी कार्यकर्ता मिलकर मीनाक्षी नटराजन को पूरे दमखम के साथ जिताकर संसद के उच्च सदन भेजेंगे। उनके इस खुले समर्थन के बाद प्रदेश की चुनावी सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं।

दूसरी ओर राज्यसभा चुनाव की इसी गरमाहट के बीच राजधानी भोपाल में कांग्रेस विधायक दल की एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक बुलाई गई। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में तीसरी सीट पर पार्टी उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने को लेकर बहुत गहन चर्चा और मंथन हुआ है।

विधायक दल की बैठक में सीक्रेट साइन कराने से बढ़ी हलचल

इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मीनाक्षी नटराजन और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई सीनियर नेता मौजूद रहे। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इस सीक्रेट मीटिंग में अचानक सभी मौजूद विधायकों से जरूरी दस्तावेजों पर साइन करवाए गए हैं।

कांग्रेस विधायकों से अचानक दस्तखत करवाने के इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा शुरू कर दी है। राजनीतिक विश्लेषक इस पूरी कवायद को चुनाव के दौरान संभावित क्रॉस वोटिंग के खतरे और आंतरिक असंतोष को रोकने के कड़े प्रयास से जोड़कर देख रहे हैं।

दो विधायकों की अनुपस्थिति से कांग्रेस की बढ़ी चिंता

इस महत्वपूर्ण बैठक से कांग्रेस के दो प्रमुख विधायक बिना किसी पूर्व सूचना के पूरी तरह गैरहाजिर रहे। विधायकों की यह अनुपस्थिति पार्टी आलाकमान के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। हालांकि विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

इन तमाम कयासों के बीच राज्य के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बड़ा दावा पेश किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में पूरे भरोसे के साथ कहा कि वे मीनाक्षी नटराजन को हर हाल में राज्यसभा पहुंचाकर ही दम लेंगे। कांग्रेस एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

Author: Vijay Chouhan

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