Madhya Pradesh News: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में नए जजों की नियुक्ति के लिए अपनी महत्वपूर्ण मंजूरी दे दी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई बैठक में मध्य प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के लिए कई नामों की सिफारिश की गई है। इस फैसले से अदालतों में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने में बड़ी मदद मिलेगी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अमित लाहोटी के नाम पर मुहर
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपनी हालिया बैठक में अधिवक्ता अमित लाहोटी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कॉलेजियम ने आधिकारिक बयान जारी कर इस निर्णय की पुष्टि की है। अब इस चयन की फाइल को आगे की औपचारिक प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है।
वर्तमान समय में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की भारी कमी बनी हुई है। यहां जजों की कुल स्वीकृत संख्या 53 है, जबकि केवल 40 जज ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में अमित लाहोटी की यह नई नियुक्ति राज्य की न्याय व्यवस्था के कार्यभार को संतुलित करने में बेहद मददगार साबित होगी।
कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के लिए भी नए नामों की सिफारिश
कॉलेजियम ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के लिए भी छह अनुभवी अधिवक्ताओं के नामों को अपनी हरी झंडी दिखाई है। इनमें राघवेंद्र सीताराम श्रीवत्स, हेमा कुलकर्णी, सुब्रमण्य रंगाराव, थडागवाड़ी प्रकाश विवेकानंद, बक्केश्वर प्रमोद और होम्बे गौड़ा शांति भूषण शामिल हैं। इन सभी नए नामों से उच्च न्यायालय की कार्यक्षमता में काफी सुधार होने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के लिए तीन वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के नामों का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। इस सूची में चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। यह कदम पहाड़ी राज्य में न्याय प्रणाली को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया है।
जानिए क्या है हाई कोर्ट जज नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया
उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति एक बेहद जटिल और निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरी की जाती है। सबसे पहले संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अपने दो वरिष्ठतम सहयोगियों से विचार-विमर्श कर नामों को तय करते हैं। इसके बाद यह फाइल मुख्यमंत्री के माध्यम से राज्यपाल और फिर केंद्र सरकार तक पहुंचती है।
केंद्र सरकार इस पूरे प्रस्ताव की बारीकी से जांच करने के बाद इसे अंतिम फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को सौंपती है। कॉलेजियम की अंतिम मुहर लगने के बाद फाइल दोबारा केंद्र को भेजी जाती है। अंत में राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी और राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह नियुक्तियां लागू होती हैं।
Author: Vijay Chouhan


