Uttarakhand News: “अब इनके बिना हम कैसे जी पाएंगे। मुझे और छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर चले गए।” जैसे ही नरेंद्र का पार्थिव शरीर बागजाला स्थित उनके घर पहुंचा, उनकी पत्नी अनीता फूट-फूटकर रोने लगीं। सिसकते हुए उनके मुंह से बस यही बेबस शब्द निकल रहे थे।
ढह गया खुशियों का आशियाना
जिस हंसते-खेलते परिवार में कभी खुशियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और गहरा मातम पसरा हुआ है। मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया है। नरेंद्र के भाई ललित प्रसाद भी अपने भाई के शव को देखकर पूरी तरह सुध-बुध खो बैठे।
मूल रूप से सोमेश्वर के रहने वाले नरेंद्र ने करीब एक साल पहले ही बड़े अरमानों से अपना नया घर बनवाया था। उनका सपना था कि इस नए आशियाने में उनका परिवार हमेशा खुशहाल रहेगा। वह अपने पीछे पत्नी अनीता, बड़ी बेटी हिमानी और छोटे बेटे युवी को छोड़ गए हैं।
बुझ गया घर का इकलौता चिराग
नरेंद्र की असमय मौत के बाद अब उनकी पत्नी अनीता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दोनों बच्चे अभी स्कूल जाने लगे हैं और अब अनीता की पूरी जिंदगी इन मासूमों के सहारे ही कटेगी। इस हृदयविदारक घटना से पूरे इलाके के लोग बेहद स्तब्ध और दुखी हैं।
वहीं दूसरी ओर, पंचायत घर निवासी मृतक अमित आर्य के घर में भी कोहराम मचा हुआ है। परिजनों ने रोते हुए बताया कि अमित की शादी की बातचीत चल रही थी। घर में उसकी दो शादीशुदा बहनें, एक छोटा भाई और बीमार माता-पिता हैं। अमित ही मेहनत-मजदूरी कर पूरे परिवार का पेट पाल रहा था।
Author: Harish Rawat


