Delhi News: राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ रही आग की भीषण घटनाओं के बीच अग्निशमन विभाग के कर्मियों की सुरक्षा अब एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। आग बुझाने के दौरान दमकलकर्मी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालते हैं। लेकिन संसाधनों और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी उनके लिए इस चुनौती को कई गुना बढ़ा रही है।
हाल के दिनों में राहत कार्य करते समय कई दमकलकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। नियम तो यह है कि जोखिम भरे ऑपरेशनों के दौरान उनके पास सभी आधुनिक सुरक्षा उपकरण होने चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। शुक्रवार को भी ग्रेटर कैलाश-1 स्थित एक दफ्तर में आग बुझाते समय दो फायर ऑपरेटर बुरी तरह झुलस गए।
घायल जांबाज कर्मियों को तुरंत सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल्ली अग्निशमन विभाग लंबे समय से आधुनिक उपकरणों और स्टाफ की भारी किल्लत से जूझ रहा है। वर्तमान में दिल्ली में करीब 2500 दमकलकर्मी तैनात हैं, जबकि मानकों के अनुसार राजधानी जैसे महानगर के लिए कम से कम 12 हजार कर्मियों की सख्त जरूरत है।
बढ़ती आबादी और ऊंची इमारतों के मुकाबले कर्मियों की यह संख्या बेहद कम है। विभाग के पास वर्तमान में महज 323 फायर फाइटिंग उपकरण उपलब्ध हैं, जबकि आवश्यकता लगभग 600 उपकरणों की है। इसी तरह, दिल्ली में अभी केवल 71 फायर स्टेशन संचालित हो रहे हैं, जबकि त्वरित पहुंच के लिए कम से कम 120 फायर स्टेशन होने चाहिए।
इन मुख्य कारणों से हादसे का शिकार हो रहे हैं दमकलकर्मी
अधिकारियों के मुताबिक, सीमित संसाधनों के बावजूद कर्मी पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रहे हैं। हालांकि, बदलते शहरी ढांचे को देखते हुए विभाग को अतिरिक्त बजट और आधुनिक मानव संसाधन देना बेहद जरूरी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, 3 जून को मालवीय नगर के हौजरानी में और मार्च 2026 में बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में आग बुझाते समय कई कर्मी घायल हुए थे।
दमकलकर्मियों के झुलसने के पीछे मुख्य रूप से बैटरी और केमिकल ब्लास्ट होते हैं, जो अचानक लपटें तेज कर देते हैं। इसके अलावा अवैध निर्माण, संकरी गलियों और पुरानी दिल्ली के बाजारों में वेंटिलेशन न होने से तापमान तेजी से बढ़ता है। अत्यधिक ऊंचे तापमान के कारण सुरक्षात्मक गियर (पीपीई) पहनने के बावजूद थर्मल बर्न का खतरा हमेशा बना रहता है।
Author: Gaurav Malhotra


