Delhi News: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद अब आम जनता पर महंगाई की एक और बड़ी मार पड़ी है। बाजार में विभिन्न प्रकार की दालों की कीमतों में अचानक भारी उछाल देखने को मिल रहा है।
इस अनियंत्रित महंगाई ने आम भारतीय परिवारों की रसोई का पूरा मासिक बजट बुरी तरह से बिगाड़ दिया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते पिछले पंद्रह दिनों के भीतर ही पेट्रोल-डीजल के दाम साढ़े सात रुपये तक बढ़ चुके हैं।
ईंधन के दाम बढ़ने से देश के भीतर ट्रांसपोर्टेशन की लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों में खराब मौसम की मार के कारण मंडियों में दालों की आवक कम हो गई है, जिससे खुदरा कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
मालभाड़ा बढ़ने और खराब मौसम से कम हुई देश में आवक
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत के लिए आयात पहले ही काफी महंगा हो चुका है। अब घरेलू बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा और गहरा असर देश के मालभाड़े पर साफ दिख रहा है।
देश के विभिन्न रूटों पर ट्रकों का किराया पहले के मुकाबले बहुत अधिक बढ़ गया है। इस वजह से मुख्य थोक मंडियों से लोकल किराना दुकानों तक विभिन्न दालों को पहुंचाने की कुल परिवहन लागत में भारी इजाफा हुआ है।
इसके अतिरिक्त देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में बेमौसम बारिश और अल-नीनो के प्रभाव ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस खराब मौसम की वजह से खेतों में उड़द और तुअर की खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं।
थोक बाजार में अरहर दाल की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल
ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही गंभीर बाधाओं और डॉलर की मजबूती ने विदेशों से होने वाले दालों के आयात को भी बहुत खर्चीला बना दिया है। खुदरा बाजार में फिलहाल अरहर दाल 115 से 150 रुपये प्रति किलो बिक रही है।
इसके अलावा बाजार में उड़द दाल 110 से 140 रुपये, मूंग दाल 95 से 130 रुपये, मसूर दाल 85 से 110 रुपये और चना दाल 80 से 95 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है।
थोक कारोबारियों के अनुसार थोक बाजार में अरहर दाल की कीमतों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अरहर के दाम करीब बारह फीसदी तक उछलकर 9000 से 12250 रुपये प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
विदेशी आयात महंगा होने से खुदरा बाजार में बढ़ी कीमतें
उत्तर प्रदेश की विभिन्न कृषि मंडियों में इस समय अरहर दाल का औसत थोक भाव करीब 10440 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी जैसी बड़ी मंडियों में इसकी अधिकतम कीमत 11000 रुपये प्रति क्विंटल पर है।
भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए म्यांमार और कई अन्य अफ्रीकी देशों से बहुत बड़े पैमाने पर अरहर दाल का नियमित आयात करता है। लेकिन पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव ने समुद्री व्यापार को प्रभावित किया है।
समुद्री रास्तों का मालभाड़ा अत्यधिक बढ़ जाने की वजह से विदेशी अरहर दाल भारत पहुंचते-पहुंचते बहुत महंगी हो रही है। यही मुख्य कारण है कि देश के खुदरा बाजारों में आम उपभोक्ताओं को अरहर के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
Author: Rajesh Kumar


