Delhi News: राजधानी दिल्ली में लगातार हो रहे अग्निकांडों ने पूरी कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिक मुनाफा कमाने के लालच में रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। दुखद पहलू यह है कि बड़े हादसों के बाद भी जिम्मेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती है।
दिल्ली पुलिस और नगर निगम की कार्रवाई अक्सर केवल संपत्ति को सील करने तक ही सीमित रह जाती है। पिछले सात सालों में दिल्ली में आग के कारण 500 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद मुकदमों की सुस्त रफ्तार के कारण आरोपियों के मन से कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।
ऐतिहासिक मामलों को देखें तो साल 1997 का उपहार सिनेमा अग्निकांड इकलौता ऐसा मामला है, जिसमें सजा हुई थी। उस हादसे में 59 लोगों की जान गई थी। करीब 20 साल चले लंबे मुकदमे के बाद अदालत ने सिनेमा हॉल के दो मालिकों पर 30-30 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया था।
अर्पित पैलेस होटल: 7 साल बाद भी कोई सजा नहीं
करोलबाग के अर्पित पैलेस होटल में 12 फरवरी 2019 को भीषण आग लगी थी। इस दर्दनाक हादसे में विदेशी नागरिकों सहित 17 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में होटल मालिक राकेश गोयल और शरद इंदु गोयल सहित सात लोगों को मुख्य आरोपी बनाया था।
इस केस में चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी सुनवाई की रफ्तार बेहद धीमी है। मामले में कुल 125 गवाह हैं और सभी आरोपी साल 2024 से जमानत पर बाहर घूम रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि उस जर्जर हो चुकी होटल की इमारत में अब नए नाम से दोबारा निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
अनाज मंडी और मुंडका के आरोपी भी जमानत पर
रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी में 8 दिसंबर 2019 को लगी आग में 43 लोग जिंदा जल गए थे। पुलिस ने इमारत के मालिकों मोहम्मद रेहान, इमरान, सुहैल और फुरकान को आरोपी बनाया था। कोर्ट में आरोप तय होने के बाद अब यह मामला नियमित ट्रायल पर है, लेकिन सभी आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
इसी तरह 13 मई 2022 को मुंडका की एक चार मंजिला इमारत में लगी आग में 27 लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली पुलिस ने मालिक मनीष लाकड़ा और किरायेदार वरुण गोयल सहित पांच लोगों पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया था। मार्च 2023 में मुख्य आरोपियों को अदालत से आसानी से जमानत मिल गई।
पालम और विवेक विहार मामले में अब तक चार्जशीट नहीं
इसी साल मार्च में पालम के राम चौक की एक चार मंजिला इमारत में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस अब तक अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है। जांच एजेंसियां फिलहाल फोरेंसिक और दमकल विभाग की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं।
वहीं, तीन मई को विवेक विहार के एक मकान में लगी आग में भी 9 लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे को एक महीना बीत जाने के बाद भी अभी सिर्फ मजिस्ट्रेटी जांच ही चल रही है। निगम ने अब तक अपनी स्ट्रक्चर रिपोर्ट नहीं सौंपी है, जिसके कारण पुलिस की आगे की कार्रवाई पूरी तरह अटकी हुई है।
Author: Gaurav Malhotra


