Shimla News: पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से लाभान्वित अनुसूचित जनजातीय क्षेत्र के 21 विद्यार्थियों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से सचिवालय में मुलाकात की। इस दौरान छात्रों ने अपने शैक्षणिक अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए उपलब्ध सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि डॉ. वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना के तहत छात्रों को उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 20 लाख रुपये तक का ऋण केवल एक प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
उच्च शिक्षा के लिए मिल रही विशेष सहायता
सुक्खू ने विद्यार्थियों से कहा कि वे राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का अधिकतम लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि आर्थिक कारण किसी भी छात्र की शिक्षा में बाधा नहीं बनने चाहिए। सरकार का उद्देश्य प्रतिभाशाली युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए कई सुधार लागू किए गए हैं। राज्य सरकार ने ऐसे प्रयास किए हैं, जिनसे विद्यार्थियों को अपने घरों के निकट ही बेहतर शिक्षा सुविधाएं मिल सकें। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों को विशेष लाभ मिल रहा है।
156 से अधिक स्कूलों में शुरू हुआ सीबीएसई पाठ्यक्रम
उन्होंने कहा कि प्रदेश के 156 से अधिक सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया गया है। इन विद्यालयों में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय की पढ़ाई करवाई जा रही है। सरकार का लक्ष्य छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराना और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि शिक्षा क्षेत्र में किए गए व्यावहारिक सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। हाल ही में हुए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के मामले में हिमाचल प्रदेश की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
शिक्षा क्षेत्र में बेहतर हुई प्रदेश की स्थिति
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश शिक्षा गुणवत्ता के मामले में 13वें स्थान से बढ़कर छठे स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों और शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक सुधारों को भी प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि बेटियों की विवाह योग्य आयु को लड़कों के समान 21 वर्ष करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही अनुसूचित जनजाति समुदाय की शैक्षिक उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि 10 मई से 9 जून 2026 तक अनुसूचित जनजाति गरिमा उत्सव मनाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य जनजातीय समाज की शिक्षा और विकास में भूमिका को उजागर करना है। कार्यक्रम में शिक्षा सचिव राकेश कंवर, उच्च शिक्षा निदेशक हरीश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
Author: Rashmi Sharma

