उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 60 साल बाद लौटेगी सदियों पुरानी महान परंपरा, क्षिप्रा नदी के मूल जल में डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु

Madhya Pradesh News: उज्जैन महाकुंभ को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को एक बेहद ऐतिहासिक घोषणा की है। सिंहस्थ 2028 उत्सव में सभी भक्तों को क्षिप्रा नदी के वास्तविक जल में ही पवित्र डुबकी लगाने की अनुमति दी जाएगी। यह फैसला लगभग छह दशकों बाद एक पुरानी परंपरा की गौरवशाली वापसी का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह बड़ी घोषणा उज्जैन में आयोजित ‘क्षिप्रा तीर्थ परिक्रमा कार्यक्रम’ के समापन समारोह के दौरान की। इस ऐतिहासिक घोषणा से देश-विदेश के संतों और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। सरकार इस बार महाकुंभ को और अधिक दिव्य बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है।

तीस किलोमीटर लंबे घाटों पर बनेंगी भव्य सुविधाएं

इससे पहले के सिंहस्थ आयोजनों में स्नानादि अनुष्ठान अन्य बाहरी स्रोतों से लाए गए पानी का उपयोग करके कराए जाते थे। मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि क्षिप्रा नदी के पावन तटों पर करीब 30 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले घाटों पर स्नान की विश्वस्तरीय व्यवस्थित सुविधाएं तैयार की जाएंगी।

इस अनूठी सरकारी पहल का मुख्य उद्देश्य उन करोड़ों भक्तों की लंबे समय से चली आ रही इच्छा को पूरा करना है। इन श्रद्धालुओं ने साल 2016 के पिछले सिंहस्थ के दौरान नर्मदा नदी के मिश्रित पानी के बजाय पूरी तरह क्षिप्रा के शुद्ध जल में स्नान करने की इच्छा जताई थी।

उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के साथ नए रिकॉर्ड बनाएगा सिंहस्थ

मुख्यमंत्री ने जनता को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार ने करोड़ों लोगों की इन धार्मिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक बजट और कड़े प्रशासनिक इंतजाम कर लिए हैं। बाबा महाकाल और पूज्य संतों के आशीर्वाद से सिंहस्थ 2028 का यह महाकुंभ बेहद यादगार होने वाला है।

मोहन यादव ने वादा किया कि यह महाधार्मिक आयोजन उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के साथ पूरी दुनिया में नए रिकॉर्ड स्थापित करेगा। उन्होंने इस वैश्विक भव्य आयोजन में भाग लेने वाले करोड़ों भक्तों की सुविधा बढ़ाने के लिए राज्य में चल रही कई बड़ी विकास परियोजनाओं का भी विशेष उल्लेख किया।

भोजशाला मामले पर आए कोर्ट के फैसले की चर्चा

मुख्यमंत्री यादव ने धार जिले के ऐतिहासिक भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर के संबंध में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के हालिया फैसले का भी जिक्र किया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा है कि यह विवादित स्थल मुख्य रूप से वाग्देवी यानी देवी सरस्वती को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है।

अदालत के इस नए फैसले ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस पुराने आदेश को पूरी तरह पलट दिया, जिसमें मुस्लिम समुदाय को प्रत्येक शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति मिली थी। उच्च न्यायालय का यह हालिया फैसला अब भोजशाला में देवी वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करता है।

जल संरक्षण के लिए शुरू हुआ विशेष महाअभियान

मुख्यमंत्री ने अदालती फैसलों पर मध्य प्रदेश के नागरिकों द्वारा दिखाई गई आपसी सद्भाव और सहयोग की जमकर सराहना की। उन्होंने इसे कानून के अनुपालन का एक स्वर्णिम युग बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के वर्तमान कार्यकाल और महान सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल के बीच कई समानताएं भी रेखांकित कीं।

यादव ने मध्य प्रदेश सरकार के ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ पर भी विस्तार से चर्चा की। यह विशेष अभियान राज्य के सभी कुओं, तालाबों, नदियों, झीलों और जलाशयों जैसे प्राचीन जल निकायों के संरक्षण के उद्देश्य से तीन महीने से अधिक समय से पूरे प्रदेश में सक्रियता से चल रहा है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गर्व से नोट किया कि मध्य प्रदेश इस समय देश में नदी जोड़ने वाले अभियानों को लागू करने में सबसे अग्रणी राज्य बन गया है। सरकार की ये घोषणाएं जल संरक्षण पहलों के माध्यम से पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करते हुए सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास से जोड़ रही हैं।

Author: Vijay Chouhan

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