कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ईद पर गोवंश की कुर्बानी धार्मिक अनिवार्यता नहीं

Kolkata News: पश्चिम बंगाल में ईद-उल-जुहा के दौरान कुर्बानी को लेकर चल रहे विवाद पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार के गोवंश वध पर प्रतिबंध संबंधी आदेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने साफ कहा कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी पशु का वध करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इस मामले में दाखिल की गई याचिकाओं को खारिज करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार के नियमों के पालन को सही ठहराया है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने ईद से पहले एक नोटिस जारी कर अनिवार्य फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना गोवंश वध पर रोक लगा दी थी। राज्य सरकार के पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है। इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब अदालत ने ठुकरा दिया है।

क्या हैं सरकार के सख्त नियम?

राज्य सरकार के नियमों के मुताबिक, किसी भी पशु के वध के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी है। यह सर्टिफिकेट तभी जारी होगा जब सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी और स्थानीय पंचायत या नगरपालिका अध्यक्ष लिखित में सहमत हों कि जानवर 14 साल से अधिक का है, या किसी बीमारी या चोट के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया है।

इसके अलावा, सरकार ने खुले में होने वाले वध पर भी रोक लगा दी है। अब किसी भी पशु का वध केवल अधिकृत नगरपालिका वधशालाओं या प्रशासन द्वारा नामित स्थानों पर ही किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के तहत छह महीने की जेल या जुर्माना हो सकता है।

अपील का अधिकार और कानून की भावना

हाईकोर्ट ने सरकार को इस कानून को पूरी सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिलता है, तो वह अस्वीकृति मिलने के 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के पास अपील कर सकता है। कोर्ट ने कानून की भावना को बरकरार रखते हुए याचिकाओं को खारिज किया है।

इस फैसले के बाद अब राज्य में ईद के दौरान कुर्बानी के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री सरकार का यह रुख और उस पर हाईकोर्ट की मुहर, सार्वजनिक व्यवस्था और पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर अब तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

Author: Sourav Banerjee

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