Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के सेवा मामलों को लेकर एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुक्खू सरकार ने कोर्ट में लगातार बढ़ते मुकदमों को देखते हुए हैंडबुक ऑन पर्सनल मैटर्स के इस्तेमाल पर नए निर्देश जारी किए हैं। अब प्रशासनिक फैसलों के लिए केवल मूल अधिसूचनाएं ही वैध मानी जाएंगी।
हिमाचल सरकार ने हैंडबुक की स्वतंत्र कानूनी वैधता को नकारा
कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार हैंडबुक के वर्णनात्मक हिस्सों के आधार पर अब कोई निर्णय नहीं होगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1986 और 1995 के बाद इस पुस्तिका का संशोधित संस्करण साल 2021 में जारी हुआ था। इसका उद्देश्य केवल विभिन्न निर्देशों को एक जगह संकलित करना था।
राज्य सरकार के संज्ञान में आया है कि हैंडबुक के कई वर्णनात्मक अंशों में गंभीर त्रुटियां और विसंगतियां मौजूद हैं। यहां तक कि उच्च न्यायालय ने भी कुछ मामलों में इन गलत अंशों का संदर्भ लिया था। इससे मूल सरकारी आदेशों से बिल्कुल अलग और विपरीत व्याख्याएं सामने आने लगी थीं।
विभागीय विसंगतियों को दूर करने के लिए वेरिफिकेशन हुआ अनिवार्य
इस भ्रम को दूर करने के लिए नए नियमों के तहत सभी विभागों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। अब किसी भी सेवा मामले में अंतिम निर्णय लेने से पहले मूल दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था से प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता आएगी और मुकदमों में कमी आएगी।
यदि किसी नियम या नीति की व्याख्या को लेकर कोई संशय पैदा होता है, तो प्रक्रिया बदल जाएगी। संबंधित प्रशासनिक विभाग को अब सीधे कार्मिक विभाग या वित्त विभाग से औपचारिक स्पष्टीकरण प्राप्त करना होगा। कार्मिक और वित्त विभाग ही राज्य के अंतर्गत सेवा शर्तों के नोडल विभाग हैं।
सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर सभी मूल अधिसूचनाएं, नीतिगत आदेश और नए दिशा-निर्देश आम जनता के लिए उपलब्ध करा दिए गए हैं। इस नए कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवा के मामलों में एकरूपता, प्रशासनिक स्थिरता और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना है ताकि कर्मचारियों को सही न्याय मिल सके।
Author: Sunita Gupta


