Himachal Chemist Strike: ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ भड़के केमिस्ट, हिमाचल प्रदेश में 10 हजार से अधिक दुकानें बंद

Himachal Pradesh News: दवा विक्रेताओं की देशव्यापी हड़ताल का असर हिमाचल प्रदेश में भी साफ देखने को मिला। बुधवार को प्रदेशभर के 10 हजार से ज्यादा निजी मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे। इस बड़े विरोध प्रदर्शन के कारण राजधानी शिमला सहित राज्य के कई हिस्सों में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

सरकारी अस्पतालों के भीतर काउंटर खुले रहे

शिमला के आईजीएमसी और रिपन अस्पताल जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में सरकारी दवा दुकानें खुली रहीं। इस व्यवस्था से स्थानीय मरीजों को काफी राहत मिली। आपातकालीन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ निजी केमिस्टों ने मानवता के नाते दुकानें खोलकर लोगों को तुरंत जरूरी दवाएं भी उपलब्ध करवाईं।

दवा विक्रेता संगठन ई-कॉमर्स कंपनियों और ऑनलाइन दवा बिक्री को मिलने वाली सरकारी छूट का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। केमिस्टों का आरोप है कि बिना कड़े नियमों के ई-फार्मेसी कंपनियां धड़ल्ले से कारोबार कर रही हैं। इससे देश के छोटे और पारंपरिक दवा दुकानदारों का व्यापार पूरी तरह चौपट हो रहा है।

कोरोना काल के पुराने सर्कुलर का गलत इस्तेमाल

हिमाचल प्रदेश सोसायटी ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के अध्यक्ष संजीव पंडित ने कहा कि ऑनलाइन कंपनियां महामारी के समय जारी एक पुराने नियम का गलत फायदा उठा रही हैं। तब केवल बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए घर पर दवा देने की विशेष छूट थी, जिसे अब व्यावसायिक हथियार बना लिया गया है।

पंडित ने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म एआई तकनीक से नकली डॉक्टर पर्चे तैयार कर रहे हैं। यह लापरवाही मरीजों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने आशंका जताई कि इस लचर ऑनलाइन व्यवस्था से समाज में प्रतिबंधित नारकोटिक दवाओं की अवैध बिक्री भी काफी बढ़ सकती है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पहले भी सौंपा ज्ञापन

संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि वे इस गंभीर मुद्दे पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। भारी छूट की होड़ के कारण पारंपरिक दवा विक्रेता इस बाजार की प्रतिस्पर्धा में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं।

हालांकि हड़ताल के दौरान आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया गया। सोलन के एक निजी अस्पताल में दिल के मरीज के ऑपरेशन के लिए केमिस्ट ने विशेष रूप से दुकान खोली। इसके उलट नाहन मेडिकल कॉलेज पहुंचे ग्रामीण इलाकों के मरीजों को दवा न मिलने से परेशान होना पड़ा।

Author: Sunita Gupta

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