Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में धनबल के इस्तेमाल पर राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। जिला परिषद उम्मीदवारों द्वारा तय सीमा से अधिक पैसा खर्च करने की शिकायतों पर आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। इसके लिए सभी जिलों में विशेष उड़नदस्ते तैनात किए गए हैं।
नामांकन के दिन से जुड़ेगा चुनावी खर्च का पूरा हिसाब
राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि जिला परिषद सदस्य पद के लिए चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा एक लाख रुपये है। उम्मीदवारों का पूरा चुनावी खर्च नामांकन पत्र दाखिल करने के दिन से ही उनके खाते में जोड़ा जाएगा। इस नियम का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आयोग को मिली शिकायतों के मुताबिक कई उम्मीदवार प्रचार के दौरान गाड़ियों के लंबे काफिले निकाल रहे हैं। वे भारी भीड़ और रोड शो के जरिए शक्ति प्रदर्शन कर माहौल बदलने की कोशिश में जुटे हैं। इन वीआईपी चुनाव प्रचारों और महंगी प्रचार सामग्रियों पर उड़नदस्ते पैनी नजर रख रहे हैं।
प्रधान और उपप्रधान पद के लिए नहीं कोई खर्च सीमा
आयोग ने स्पष्ट किया कि जिला परिषद के लिए नियम कड़े हैं। दूसरी ओर प्रधान, उपप्रधान, वार्ड पंच और पंचायत समिति सदस्य के उम्मीदवारों के लिए खर्च की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इन पदों के प्रत्याशियों की गतिविधियों की भी सामान्य निगरानी की जा रही है।
चुनाव आयोग ने सभी जिला पर्यवेक्षकों को निर्देश जारी किए हैं कि वे हर चुनावी हलचल की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। आयोग का मुख्य उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखना है। इसके साथ ही उन्होंने प्रत्याशियों को तय नियमों के भीतर रहकर प्रचार करने की सलाह दी है।
Author: Sunita Gupta


