सैनिकों के मसीहा: जब मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी ने बदली उत्तराखंड के पूर्व सैनिकों की तकदीर

Dehradun News: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेवानिवृत्त) ने अपने कार्यकाल के दौरान सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। एक फौजी की पृष्ठभूमि से होने के नाते, उन्होंने सीमाओं पर तैनात जवानों के त्याग और सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व सैनिकों की चुनौतियों को गहराई से समझा। उनके द्वारा लिए गए निर्णय आज भी राज्य के सैन्य परिवारों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह हैं।

जनरल खंडूड़ी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद सैनिक कल्याण के लिए एक नई कार्ययोजना तैयार की। उनका सबसे बड़ा योगदान वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों के सम्मान और आर्थिक सहयोग में वृद्धि करना रहा। उन्होंने परमवीर चक्र विजेताओं के लिए अनुदान राशि को बढ़ाकर 25 लाख रुपये और शौर्य चक्र के लिए 10 लाख रुपये तक सुनिश्चित किया, जो उस समय के हिसाब से एक ऐतिहासिक फैसला था।

सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर

खंडूड़ी सरकार ने केवल अनुदान तक ही सीमित न रहकर सैनिकों के पुनर्वास और उनकी सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत किया। सरकारी नौकरियों में पूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित आरक्षण को पूरी सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया गया। इसके अलावा, उन्होंने स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से सेवानिवृत्त सैनिकों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए।

स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। राज्य स्तर पर बेहतर समन्वय के माध्यम से उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि पूर्व सैनिकों को एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) का लाभ सुलभ हो सके। इससे राज्य के दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले उन दिग्गजों को भी बेहतर इलाज मिल सका, जो पहले चिकित्सा सुविधाओं से वंचित थे।

जनरल खंडूड़ी के प्रमुख ऐतिहासिक फैसले

सैनिकों के प्रति उनके समर्पित दृष्टिकोण का अंदाजा इन बड़े सुधारों से लगाया जा सकता है, जिन्होंने कई परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए:

  • वित्तीय सहयोग: वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों के लिए एकमुश्त अनुदान राशि में भारी बढ़ोतरी की गई।
  • जीवन भर सहायता: वार्षिक अनुदान को मात्र 30 साल की सीमा से हटाकर पूरे जीवनकाल के लिए लागू कर दिया गया।
  • आवासीय सहायता: सैनिकों और उनके परिवारों के लिए आवास सहायता को आठ गुना तक बढ़ाया गया।
  • सुलभ संपर्क: सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य स्तर पर एक समर्पित टोल-फ्री नंबर की शुरुआत की गई।
  • पेंशन सुधार: द्वितीय विश्वयुद्ध के वयोवृद्ध सैनिकों और उनकी विधवाओं की मासिक पेंशन में सम्मानजनक वृद्धि की गई।

जनरल खंडूड़ी द्वारा स्थापित जिला स्तरीय तंत्र ने यह सुनिश्चित किया कि सैनिकों की समस्याओं का समाधान अब फाइलों में नहीं, बल्कि त्वरित रूप से हो। उनके कार्यकाल में उठाए गए इन कदमों ने न केवल पूर्व सैनिकों को सम्मान दिया, बल्कि उत्तराखंड की भावी पीढ़ी के लिए राष्ट्र सेवा के प्रति एक नई प्रेरणा भी छोड़ी। आज भी, जब राज्य में सैनिक कल्याण की बात होती है, तो खंडूड़ी सरकार के ये फैसले एक बेंचमार्क के रूप में याद किए जाते हैं।

Author: Harish Rawat

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