डिजिटल जनगणना-2027: घर बैठे दें अपने परिवार का विवरण, स्व-गणना की समय सीमा बढ़ाने के संकेत

Lucknow News: भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना-2027 का पहला चरण जोर-शोर से चल रहा है। उत्तर प्रदेश में ‘मकान सूचीकरण’ (Houselisting) प्रक्रिया के तहत नागरिकों को ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) की सुविधा दी गई है। अब तक लाखों लोगों ने आधिकारिक पोर्टल (https://se.census.gov.in/) के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर इस राष्ट्रीय महाभियान में अपना योगदान दिया है।

राज्य के जनगणना कार्य निदेशालय के अनुसार, स्व-गणना की प्रक्रिया किसी भी घर-घर जाकर होने वाली गणना से पहले की एक अहम कड़ी है। यह नागरिकों को अपनी सुविधानुसार परिवार और मकान का विवरण दर्ज करने का अवसर प्रदान करती है। इस डेटा का सत्यापन 22 मई से शुरू होने वाले घर-घर सर्वेक्षण के दौरान प्रगणकों (Enumerators) द्वारा किया जाएगा।

ऐसे करें ऑनलाइन स्व-गणना

डिजिटल जनगणना में भागीदारी के लिए नागरिकों को सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर लॉग इन करना होगा। इसके बाद अपने मोबाइल नंबर का उपयोग करके पंजीकरण करें और अपने निवास स्थान को डिजिटल मैप पर चिह्नित करें। पूरी प्रक्रिया में लगभग 15 से 20 मिनट का समय लगता है। सफलतापूर्वक फॉर्म भरने के बाद, आपको 11 अंकों की एक ‘स्व-गणना आईडी’ (SE ID) मिलेगी, जिसे प्रगणक के दौरे के समय उन्हें दिखाना होगा।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति के एक से अधिक जिलों में मकान हैं, तो रिकॉर्ड दोनों स्थानों पर बनेगा, लेकिन व्यक्ति की गणना केवल उसी स्थान पर होगी जहां वह ‘सामान्य रूप से’ निवास करता है। विवाहित बेटियों और अन्य शहरों में नौकरी या पढ़ाई कर रहे सदस्यों के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं ताकि दोहरी गिनती की समस्या न हो।

जनगणना में प्रदेश के जिलों की स्थिति

डिजिटल स्व-गणना में जनभागीदारी के रुझान चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के अनुसार, औरैया, सोनभद्र, शाहजहांपुर, मुरादाबाद और मैनपुरी जैसे जिलों में उत्साहजनक भागीदारी देखी जा रही है। दूसरी ओर, गौतमबुद्धनगर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, आगरा और प्रयागराज जैसे बड़े जिलों में अभी भी अपेक्षित लक्ष्य तक पहुंचने की चुनौती बनी हुई है।

शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे गांवों और शहरी क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं। लोगों को यह समझना होगा कि सही आंकड़े ही भविष्य की सरकारी योजनाओं और विकास की दिशा तय करेंगे। डिजिटल जनगणना न केवल समय की बचत करती है, बल्कि डेटा की सटीकता और पारदर्शिता को भी सुनिश्चित करती है, जो देश के समावेशी विकास के लिए अनिवार्य है।

Author: Amit Yadav

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