ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: व्लादिमीर पुतिन आएंगे भारत, शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता पर टिकी सबकी नजरें!

New Delhi News: इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन व्यक्तिगत रूप से भाग लेंगे। क्रेमलिन के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है। यह पुतिन का एक साल के भीतर दूसरा भारत दौरा होगा, जो दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों का संकेत है।

सम्मेलन की तैयारियों के बीच यह खबर भी है कि शिखर सम्मेलन के इतर राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। इस साल 12 और 13 सितंबर को होने वाला यह आयोजन वैश्विक राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ब्रिक्स का दायरा लगातार बढ़ रहा है और यह समूह दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकतों का केंद्र बनता जा रहा है।

ब्रिक्स का विस्तार और बढ़ती वैश्विक ताकत

मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ यह संगठन अब एक विशाल वैश्विक मंच का रूप ले चुका है। वर्ष 2024 में मिस्त्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के जुड़ने और 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने के बाद, अब इस समूह में 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।

सांख्यिकीय दृष्टि से ब्रिक्स अब अत्यंत शक्तिशाली है। यह समूह दुनिया की कुल आबादी के लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग 26 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। नई दिल्ली में होने वाला यह शिखर सम्मेलन इन देशों के बीच व्यापार, निवेश और वैश्विक नीति निर्धारण पर नई दिशा दे सकता है।

पुतिन की चीन यात्रा और रणनीतिक साझेदारी

ब्रिक्स सम्मेलन से पूर्व राष्ट्रपति पुतिन इन दिनों चीन की दो दिवसीय यात्रा पर हैं, जहाँ वे चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात कर रहे हैं। यह यात्रा ‘चीन-रूस मित्रता संधि’ की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हो रही है। इस दौरान दोनों नेता आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा करेंगे। यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस के लिए चीन का व्यापारिक समर्थन बेहद महत्वपूर्ण रहा है।

चीन इस दौरान एक सधी हुई कूटनीति अपना रहा है, जहाँ वह अमेरिका के साथ संबंधों को स्थिर रखने के साथ-साथ रूस के साथ अपनी ‘अक्षुण्ण रणनीतिक साझेदारी’ को भी प्राथमिकता दे रहा है। ऐसे में नई दिल्ली में पुतिन और शी चिनफिंग की प्रस्तावित मुलाकात को अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक बेहद करीब से देख रहे हैं, क्योंकि इससे वैश्विक सुरक्षा और व्यापारिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

Author: Harikarishan Sharma

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