West Bengal News: पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार के सबसे बड़े फैसले पर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पद संभालते ही बांग्लादेश सीमा से सटी जमीन को बाड़ेबंदी के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपने की मंजूरी दी थी। इस बड़े फैसले पर अब जमीनी स्तर पर पेच फंसता हुआ नजर आ रहा है। राज्य के खाद्य मंत्री अशोक कीर्तनिया ने खुद स्वीकार किया है कि बशीरहाट जिले में भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रशासन को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
बशीरहाट के सीमावर्ती गांवों में जमीन देने से ग्रामीणों का साफ इनकार
उत्तर 24 परगना जिले में मीडिया से बात करते हुए खाद्य मंत्री ने इस संवेदनशील स्थिति की पूरी जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर 24 परगना के ज्यादातर इलाकों में जमीन अधिग्रहण का काम काफी संतोषजनक ढंग से चल रहा है। लेकिन बशीरहाट के तीन विशेष मौजों में स्थानीय निवासी इस बाड़ेबंदी योजना का खुलकर विरोध कर रहे हैं। प्रस्तावित सीमा क्षेत्र से हटने के लिए कई परिवार बिल्कुल तैयार नहीं हैं और वे सरकारी पुनर्वास पैकेज को भी ठुकरा रहे हैं।
खाद्य मंत्री अशोक कीर्तनिया ने जिला कलेक्टर को दिया सख्त अल्टीमेटम
इस गंभीर संकट को देखते हुए खाद्य मंत्री अशोक कीर्तनिया ने तुरंत जिला कलेक्टर से विस्तृत बातचीत की है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अगले सात दिनों के भीतर स्थानीय प्रभावित परिवारों से बात करके उन्हें हर हाल में मनाएं। राज्य सरकार अभी भी 45 दिनों के भीतर पूरी जमीन बीएसएफ को सौंपने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जता रही है। हालांकि, ग्रामीणों के कड़े तेवरों के बाद इस समय सीमा के भीतर काम पूरा होना मुश्किल लग रहा है।
अमित शाह ने चुनाव से पहले किया था सीमा को पूरी तरह सील करने का वादा
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनता से एक बड़ा वादा किया था। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से ऐलान किया था कि राज्य में भाजपा की सरकार बनते ही पहला काम घुसपैठ रोकने के लिए बीएसएफ को जमीन देने का होगा। शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनते ही अपनी पहली कैबिनेट बैठक में इस वादे पर मुहर लगाई थी। उन्होंने घोषणा की थी कि सरकार जल्द ही 600 एकड़ जमीन केंद्र को सौंप देगी।
बंगाल और बांग्लादेश के बीच 569 किलोमीटर सीमा अभी भी पूरी तरह खुली
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच कुल 2,217 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। इसमें से करीब 1,648 किलोमीटर हिस्से पर पहले ही मजबूत कंटीली बाड़ लगाई जा चुकी है। लेकिन अभी भी लगभग 569 किलोमीटर का सीमावर्ती इलाका पूरी तरह से खुला हुआ है। इसी खुले रास्ते से लगातार होने वाली अवैध घुसपैठ और तस्करी की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार लंबे समय से जमीन की मांग कर रही थी।
भाजपा ने लगाया पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर असहयोग करने का गंभीर आरोप
सत्तारूढ़ भाजपा का सीधा आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने राजनीतिक कारणों से केंद्र को जमीन देने से साफ इनकार कर दिया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उन्होंने सीमा सुरक्षा को लेकर ममता बनर्जी को खुद कई पत्र लिखे थे। इसके बावजूद तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बाड़ेबंदी के काम में सहयोग नहीं किया। अब नई सरकार के आने के बाद भी स्थानीय विरोध इस राष्ट्रीय सुरक्षा योजना की बड़ी बाधा बन गया है।

