Patna News: बिहार सरकार ने राज्य में अल्ट्रासाउंड सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग के नए आदेश के तहत, अब सामान्य एमबीबीएस डॉक्टरों को पेट (Abdominal) और श्रोणी (Pelvic) क्षेत्र की सोनोग्राफी जांच के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह कदम राज्य के ग्रामीण और सुदूर इलाकों में रेडियोलॉजिस्ट की कमी को दूर करने में सहायक सिद्ध होगा।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा मंजूर की गई इस नई व्यवस्था के तहत, एमबीबीएस डॉक्टरों को छह महीने का ‘स्तर-1’ अल्ट्रासाउंड प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें अल्ट्रासाउंड मशीन के संचालन से लेकर पेट के आंतरिक अंगों और गर्भावस्था से जुड़ी सामान्य जांच की तकनीकी बारीकियां सिखाई जाएंगी। प्रशिक्षण के बाद ये डॉक्टर पीसीपीएनडीटी कानून के दायरे में रहकर वैध रूप से सोनोग्राफी जांच कर सकेंगे।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ेगी स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच
सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के छोटे शहरों और गांवों में प्रशिक्षित अल्ट्रासाउंड डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि करना है। वर्तमान में रेडियोलॉजिस्ट की सीमित उपलब्धता के कारण मरीजों को जांच के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है या लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम से मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही सटीक जांच की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
प्रशिक्षण प्रक्रिया के लिए सरकार ने संस्थानों का चयन, सीटों का निर्धारण और तकनीकी दिशा-निर्देशों को भी अंतिम रूप दे दिया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यक्रम न केवल डॉक्टरों के कौशल में वृद्धि करेगा, बल्कि प्रसव पूर्व और अन्य सामान्य जांचों को भी अधिक सुगम और किफायती बनाएगा, जिससे आम नागरिकों को काफी सुविधा होगी।
कानूनी दायरे में सुरक्षित और पारदर्शी सेवाएं
इस पूरी प्रक्रिया में गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान अधिनियम (PCPNDT) के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशिक्षित डॉक्टर केवल उन जांचों के लिए अधिकृत होंगे, जो इस अधिनियम के नियमों के अंतर्गत आती हैं। इससे अल्ट्रासाउंड सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।
यह पहल स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधार की दिशा में एक प्रभावी कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से डॉक्टरों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और चिकित्सा सेवाओं के वितरण में जो भौगोलिक असंतुलन है, उसे कम करने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में राज्य के सभी जिलों में इसका लाभ मरीजों तक पहुंचना शुरू हो जाएगा।
Author: Amit Yadav


