India News: भारत में फेफड़ों के कैंसर के मरीजों के लिए राहत की एक बड़ी खबर सामने आई है। बुधवार को कैंसर विशेषज्ञों और दवा कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में नई सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी तकनीक ‘टेसेंट्रिक एससी’ (Tecentriq SC) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया। चिकित्सा जगत के जानकारों के अनुसार, यह आधुनिक तकनीक कैंसर की दवा देने की प्रक्रिया को क्रांतिकारी तरीके से बदल देगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि इलाज की जटिलताएं भी कम होंगी।
इस नई तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी गति है। जहां पारंपरिक ‘आईवी इन्फ्यूजन’ (IV Infusion) के जरिए दवा देने में घंटों का समय लगता था, वहीं ‘टेसेंट्रिक एससी’ के माध्यम से यह प्रक्रिया मात्र 7 मिनट में पूरी की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय की बचत अस्पतालों में मरीजों के दबाव को कम करने और इलाज को अधिक सुलभ बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। अब मरीज को लंबे समय तक अस्पताल के बेड पर रहने की आवश्यकता नहीं होगी।
लागत और सुविधा का गणित: अस्पताल के खर्चों में आएगी बड़ी कमी
कीमत के मोर्चे पर बात करें तो यह नई तकनीक पारंपरिक विधि के मुकाबले थोड़ी महंगी है। पुरानी तकनीक की एक डोज जहां लगभग ढाई लाख रुपये की पड़ती थी, वहीं ‘टेसेंट्रिक एससी’ की कीमत करीब साढ़े तीन लाख रुपये प्रति डोज तय की गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि पारंपरिक विधि में अस्पताल में भर्ती होने और लंबी प्रक्रिया के कारण जो अतिरिक्त भारी खर्च होता था, नई तकनीक में उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। इस तरह कुल प्रभावी खर्च में संतुलन बना रहेगा।
स्विट्जरलैंड की प्रतिष्ठित दवा कंपनी रोश (Roche) की भारतीय इकाई ‘रोश इंडिया’ इस जीवन रक्षक तकनीक को भारतीय बाजार में लेकर आई है। कंपनी ने बताया कि देश के बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में इस दवा के इस्तेमाल की तैयारियां जोरों पर हैं। कम समय में प्रभावी उपचार मिलने से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है। कैंसर देखभाल क्षेत्र में इस नवाचार को स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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