अस्पताल या टॉर्चर रूम? बार-बार अश्लील बातें करता था डॉक्टर, महिला स्टाफ ने किया हंगामा; आरोपी ने मांगी माफी

Haryana News: हरियाणा के फतेहाबाद में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां सेक्टर तीन के पॉली क्लीनिक में एक डॉक्टर पर महिला कर्मचारियों से अभद्रता करने का आरोप लगा है। नवनियुक्त डॉक्टर नरेंद्र महिला स्टाफ से बार-बार कंडोम के इस्तेमाल को लेकर असहज करने वाले सवाल पूछते थे। इस उत्पीड़न से परेशान होकर महिलाओं ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। इसके बाद मामले की गंभीर शिकायत तुरंत सिविल सर्जन तक पहुंचा दी गई है।

मीटिंग में शारीरिक संबंधों पर की बात

महिला कर्मचारियों के अनुसार डॉक्टर नरेंद्र ने एक मई को अतिरिक्त एसएमओ के पद पर अपना कार्यभार संभाला था। इसके महज दो दिन बाद ही उन्होंने अपना असली रूप दिखाना शुरू कर दिया। तीन मई को उन्होंने महिला स्टाफ के साथ शारीरिक संबंधों और मेल-फीमेल रिलेशन के बारे में अवांछित बातें कीं। उन्होंने जानबूझकर बातचीत में बार-बार कंडोम शब्द का प्रयोग किया। डॉक्टर ने महिलाओं से इसका सही इस्तेमाल और इसके फायदे बताने की अश्लील कोशिश भी की।

डॉक्टर की इस घटिया हरकत पर महिला कर्मचारी असहज हो गईं और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बावजूद आरोपी डॉक्टर रुका नहीं और स्टाफ से खुलकर बात करने का दबाव बनाने लगा। इसके बाद ग्यारह मई को डॉक्टर ने हाजिरी रजिस्टर चेक किया। रजिस्टर में कई महिलाओं के नाम के आगे मिस लिखा हुआ था। इस पर डॉक्टर ने अजीब तर्क देते हुए पूछा कि क्या सभी महिला कर्मचारी अविवाहित हैं। यह पूछना स्टाफ को काफी बुरा लगा।

महिला स्टाफ ने जब खुद को विवाहित बताया तो डॉक्टर ने एक नया फरमान सुना दिया। उसने कहा कि सभी शादीशुदा महिलाएं अपने नाम के आगे मिसेज जरूर लिखें। डॉक्टर ने इसके पीछे यह अजीब सफाई दी कि वह अस्पताल में एक फ्रेंडली माहौल बनाना चाहता है। डॉक्टर की इन रोजमर्रा की हरकतों से तंग आकर महिलाओं ने अपने परिजनों को पूरी बात बताई। इसके बाद परिजनों के साथ मिलकर स्टाफ ने सिविल सर्जन से लिखित शिकायत कर दी।

आरोपी डॉक्टर का ट्रांसफर और मांगी माफी

सिविल सर्जन डॉक्टर बुधराम ने शिकायत मिलने के बाद दोनों पक्षों के बीच एक अहम बैठक करवाई। इस बैठक में विवाद का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने तुरंत प्रभाव से आरोपी डॉक्टर नरेंद्र को डेपुटेशन पर दूसरे संस्थान में भेज दिया है। इसके अलावा स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखकर आरोपी डॉक्टर के स्थायी ट्रांसफर की सख्त सिफारिश भी कर दी गई है।

मामले में चारों तरफ से घिरने के बाद आरोपी डॉक्टर नरेंद्र बैकफुट पर आ गया है। उसने अपनी गलतियों के लिए पूरे स्टाफ के सामने माफी मांग ली है। बचाव में डॉक्टर ने कहा कि यह सिर्फ एक गलतफहमी थी और उनका इरादा गलत नहीं था। उसने अपनी सत्रह साल की बेदाग मेडिकल सर्विस का भी हवाला दिया। हालांकि महिला स्टाफ डॉक्टर की इन दलीलों से बिल्कुल संतुष्ट नहीं है और वे सख्त कार्रवाई की मांग कर रही हैं।

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