एसी-कूलर की छुट्टी! वैज्ञानिकों ने खोजा बिना बिजली कमरा ठंडा करने वाला ‘जादुई नमक’, जानें क्या है नेस्कोड तकनीक

Riyadh News: भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए अब आपको भारी-भरकम बिजली बिल और महंगे एयर कंडीशनर (AC) पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सऊदी अरब के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है, जो बिना बिजली के आपके घर को शिमला जैसी ठंडक दे सकती है। इस नई तकनीक का नाम ‘नेस्कोड’ (Nescod) है, जो इन दिनों दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह तकनीक न केवल किफायती है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी मानी जा रही है।

नेस्कोड तकनीक का पूरा नाम ‘नीड-बेस्ड इलेक्ट्रिसिटी-लेस सस्टेनेबल कूलिंग ऑन डिमांड’ है। यह पूरी तरह से एक रासायनिक प्रक्रिया पर आधारित है, जिसे ‘एंडोथर्मिक डिसोल्यूशन’ कहा जाता है। इसमें अमोनियम नाइट्रेट नामक एक विशेष नमक को पानी में मिलाया जाता है। जैसे ही यह नमक पानी में घुलना शुरू होता है, यह अपने आसपास की गर्मी को तेजी से सोख लेता है। इस प्रक्रिया में किसी भी मोटर, इंजन या बिजली की खपत नहीं होती है, जो इसे अद्भुत बनाती है।

महज 20 मिनट में 25 से 3 डिग्री तक गिरेगा तापमान

वैज्ञानिक परीक्षणों के दौरान इस तकनीक के नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह तकनीक 25 डिग्री सेल्सियस वाले वातावरण को मात्र 20 मिनट में घटाकर 3.6 डिग्री सेल्सियस तक लाने में सक्षम है। यह प्रक्रिया अन्य ठंडक देने वाले रसायनों की तुलना में चार गुना अधिक प्रभावी साबित हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की मैकेनिकल मशीनरी की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे शोर और मेंटेनेंस का झंझट खत्म हो जाता है।

नेस्कोड तकनीक की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘सेल्फ-रिचार्ज’ होना है। जब अमोनियम नाइट्रेट पूरी तरह पानी में घुल जाता है, तो सौर ऊर्जा की मदद से उस पानी को भाप बनाकर उड़ा दिया जाता है। इससे नमक फिर से अपने ठोस रूप में वापस आ जाता है और दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है। यानी दिन के समय सूरज की रोशनी इस सिस्टम को रीसेट करती है और रात में यह बिना बिजली के एसी जैसी ठंडक प्रदान करता है।

पानी की बचत और पर्यावरण के लिए वरदान

सऊदी अरब जैसे शुष्क इलाकों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को जल-संरक्षण के अनुकूल बनाया है। भाप बनकर उड़ने वाले पानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए एक विशेष सिस्टम लगाया गया है, जो पानी को दोबारा इकट्ठा कर लेता है। यह तकनीक उन ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान साबित हो सकती है जहां बिजली की पहुंच नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संस्था के मुताबिक, दुनिया की 10 प्रतिशत बिजली केवल कूलिंग उपकरणों में खर्च होती है, जिसे यह तकनीक बचा सकती है।

हालांकि नेस्कोड तकनीक अभी शोध और परीक्षण के दौर में है, लेकिन इसकी संभावनाओं ने बाजार में खलबली मचा दी है। अगर यह तकनीक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होती है, तो यह मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बिजली के बिल से बड़ी राहत होगी। भारत जैसे गर्म देशों में, जहां गर्मियों में तापमान 45-50 डिग्री तक पहुंच जाता है, वहां यह तकनीक एसी और कूलर का एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर सकती है।

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