नासा ने बनाया ‘सुपर फ्रीजर’! चंद्रमा की कतिलाना ठंड में भी नहीं टूटेंगे स्पेस सूट और रोवर, जानें क्या है LESTR तकनीक

Washington News: अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो भविष्य के मून मिशनों की तस्वीर बदल देगी। चंद्रमा पर दिन में झुलसा देने वाली गर्मी और रात में हाड़ कपाने वाली जानलेवा ठंड पड़ती है। इस चरम वातावरण में इंसानों और मशीनों को सुरक्षित रखने के लिए नासा ने ‘लूनर एनवायरनमेंट स्ट्रक्चरल टेस्ट रिग’ (LESTR) नामक एक क्रांतिकारी मशीन तैयार की है।

नासा के ग्लेन रिसर्च सेंटर के इंजीनियरों द्वारा विकसित यह तकनीक चंद्रमा की भीषण रातों की नकल करने में सक्षम है। यह मशीन बिना किसी तरल गैस के स्पेस हार्डवेयर और सामग्रियों का परीक्षण कर सकती है। LESTR की मदद से अब वैज्ञानिक 40 केल्विन यानी लगभग -388 डिग्री फारेनहाइट (-233°C) तक के अत्यधिक ठंडे तापमान पर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उपकरणों की मजबूती की जांच कर सकेंगे, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के समान है।

बिना तरल गैस के ‘ड्राई सिस्टम’ से होगा परीक्षण

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर नासा अपना बेस बनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन वहां का तापमान इतना खतरनाक है कि सामान्य रबर कांच की तरह बिखर सकता है। पुराने समय में नासा इस तरह के परीक्षणों के लिए तरल नाइट्रोजन, हाइड्रोजन या हीलियम जैसे ‘क्रायोजेन’ का इस्तेमाल करता था। ये तरल पदार्थ न केवल महंगे थे, बल्कि इन्हें विशेष टैंकों में संभालना काफी जोखिम भरा और जटिल काम होता था।

एलईएसटीआर (LESTR) की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह ‘ड्राई’ होना है। इसमें किसी भी तरह के तरल पदार्थ की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह मशीन हाई-पावर क्रायोकूलर का उपयोग करके गर्मी को सोख लेती है और कड़ाके की ठंड पैदा करती है। एलईएसटीआर के तकनीकी प्रमुख एरियल डिमस्टन के अनुसार, यह विधि पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सुरक्षित, सस्ती और बेहद आसान है, जिससे समय और जोखिम दोनों कम हो जाते हैं।

स्पेससूट और रोवर के टायरों में आएगा बड़ा बदलाव

नासा की टीम इस नई मशीन का उपयोग अगली पीढ़ी के स्पेससूट के कपड़ों और रोवर के टायरों के परीक्षण के लिए कर रही है। विशेष रूप से ‘शेप मेमोरी अलॉय’ (Shape Memory Alloy) नामक धातु पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यह एक ऐसी जादुई धातु है जो मुड़ने, खिंचने या अत्यधिक ठंडी होने के बाद भी अपने मूल आकार में वापस आ जाती है। यह मंगल और चंद्रमा की ऊबड़-खाबड़ सतहों पर बहुत उपयोगी होगी।

एरियल डिमस्टन का कहना है कि जिस तरह सही ईंटों और सीमेंट की जानकारी के बिना कोई मजबूत इमारत नहीं बन सकती, ठीक उसी तरह सामग्रियों के व्यवहार को जाने बिना कोई अंतरिक्ष मिशन सफल नहीं हो सकता। यह नई तकनीक न केवल चंद्रमा, बल्कि भविष्य के मंगल मिशनों के लिए भी आधारशिला रखेगी। नासा का यह ‘सुपर फ्रीजर’ अंतरिक्ष की गहराइयों में इंसानी दखल को और अधिक सुरक्षित और स्थाई बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

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