प्रतीक यादव की मौत का वो खौफनाक सच: ICU छोड़ने की जिद या अनहोनी का संकेत? बंद कमरे में अखिलेश-अपर्णा की बातचीत के मायने

Uttar Pradesh News: समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की अचानक मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। 38 वर्षीय फिटनेस फ्रीक प्रतीक की मौत के पीछे केवल कार्डियक अरेस्ट नहीं, बल्कि कई अनसुलझे सवाल और मेडिकल पेचीदगियाँ छिपी हैं। लखनऊ स्थित उनके आवास से लेकर सैफई के पैतृक गांव तक मातम छाया हुआ है। इस बीच अखिलेश यादव और अपर्णा यादव के बीच हुई गोपनीय बातचीत और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासे अब सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बन गए हैं।

अखिलेश और अपर्णा की बंद कमरे में हुई 20 मिनट की चर्चा

असम से लखनऊ लौटने के बाद अपर्णा यादव और अखिलेश यादव के बीच करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अखिलेश ने प्रतीक के हालिया व्यापारिक घाटे और पैर की सर्जरी के बाद उपजे तनाव पर जानकारी ली। अखिलेश यादव ने मीडिया के सामने भी यह स्वीकार किया कि प्रतीक हाल के दिनों में बिजनेस प्रेशर में थे। परिवार अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या मानसिक दबाव ने उनकी शारीरिक स्थिति को और अधिक खराब कर दिया था।

मौत से पहले का डरावना घटनाक्रम और ‘LAMA’ का फैसला

प्रतीक यादव की मौत का सबसे बड़ा राज उनके द्वारा लिया गया एक आत्मघाती मेडिकल फैसला है। डॉक्टरों के अनुसार, वे पिछले 5 वर्षों से डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) से जूझ रहे थे। 30 अप्रैल को हालत बिगड़ने पर उन्हें मेदांता अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की कड़ी चेतावनी के बावजूद, 1 मई को प्रतीक ने ‘लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस’ (LAMA) पर हस्ताक्षर कर अस्पताल छोड़ दिया। डॉक्टरों का कहना है कि उस स्थिति में अस्पताल छोड़ना जानबूझकर जोखिम मोल लेने जैसा था।

असम में बैठी अपर्णा को क्या पहले ही हो गया था आभास?

जब यह दुखद घटना हुई, अपर्णा यादव एक सरकारी कार्यक्रम के लिए असम में थीं। बताया जा रहा है कि वे रातभर फोन के जरिए स्टाफ से प्रतीक का हाल लेती रहीं। उन्हें किसी अनहोनी का अंदेशा था, इसलिए उन्होंने एक करीबी ज्योतिषी से भी संपर्क साधा था। ज्योतिषी खुद तो नहीं पहुँच सके, लेकिन स्टाफ ने उन्हें बताया कि ‘प्रतीक सो रहे हैं’। विडंबना यह रही कि जिस वक्त स्टाफ उन्हें सोता हुआ समझ रहा था, संभवतः तभी उनके शरीर में घातक क्लॉट का मूवमेंट हो चुका था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट: क्या स्टेरॉयड ने ली जान या कुछ और?

सोशल मीडिया पर प्रतीक की मस्कुलर बॉडी को लेकर स्टेरॉयड के इस्तेमाल की चर्चाएं थीं, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौत का असली कारण ‘मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोम्बोलिज्म’ था। यानी उनके पैर की नस में बना खून का थक्का फेफड़ों की धमनियों में जाकर फंस गया। इससे ऑक्सीजन की सप्लाई मिनटों में रुक गई और उन्हें कार्डियक अरेस्ट आ गया। शरीर पर मिले नीले निशान ब्लड थिनर दवाइयों के असर और गिरने के कारण पाए गए हैं।

क्या होता है पल्मोनरी एम्बोलिज्म, जिसने ली प्रतीक की जान?

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, पल्मोनरी एम्बोलिज्म एक अत्यंत जानलेवा स्थिति है। इसमें शरीर के निचले हिस्से में जमा हुआ खून का थक्का रक्त प्रवाह के साथ फेफड़ों तक पहुँच जाता है। प्रतीक के बाएं पैर की हाल ही में सर्जरी हुई थी, जिससे क्लॉट बनने का खतरा काफी बढ़ गया था। डॉक्टरों का मानना है कि यदि वे ICU में रहते, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल विसरा और हार्ट को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है ताकि किसी भी तरह के जहरीले तत्व की संभावना को पूरी तरह नकारा जा सके।

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