कानपुर के मैनावती मार्ग का इतिहास जानकर कांप उठेगी रूह, अंग्रेजों ने इस 13 वर्षीय मासूम को जिंदा जलाया था

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में बिठूर को जोड़ने वाले प्रसिद्ध मैनावती मार्ग पर लाखों लोग सफर करते हैं। लेकिन बहुत कम यात्रियों को पता है कि इस मुख्य सड़क का नाम मैनावती क्यों रखा गया। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इस ऐतिहासिक मार्ग पर वीरांगना से जुड़ा कोई स्मृति चिह्न नहीं दिखता है।

दरअसल यह अनसुलझा सवाल सिर्फ किसी एक राहगीर का नहीं, बल्कि हजारों स्थानीय नागरिकों का है। हमारे जन प्रतिनिधियों और जिम्मेदार सरकारी अफसरों ने सड़क का नामकरण तो कर दिया। लेकिन नई पीढ़ी को इस महान बलिदानी की गाथा बताने के लिए कोई ठोस सूचना बोर्ड या प्रयास नहीं किया।

स्थानीय नागरिकों ने उठाई भव्य स्मारक बनाने की मांग

अब कई सामाजिक संगठनों के साथ स्थानीय नागरिक भी इस ऐतिहासिक सड़क पर मैनावती की भव्य प्रतिमा लगाने की मांग कर रहे हैं। वे मार्ग पर एक सुंदर शिलालेख भी चाहते हैं। जिससे आने-जाने वाले लोग जान सकें कि कैसे एक बहादुर बेटी ने देश के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।

भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम ऐसी ही वीर नारियों और क्रांतिकारियों के अद्वितीय बलिदानों की प्रेरक कहानियों से भरा हुआ है। ऐतिहासिक धरती कानपुर शुरू से ही ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की जननी रही है। महज 13 वर्ष की नन्ही मैनावती या मैनाकुमारी भी उन्हीं अमर हुतात्माओं में से एक थीं।

नाना साहब पेशवा की दत्तक पुत्री थीं नन्ही मैनावती

इतिहास के पन्नों के मुताबिक 03 सितंबर 1857 को ब्रिटिश सेना ने मैनावती को बिठूर में एक पेड़ से बांधकर जिंदा जला दिया था। इतिहासकार बताते हैं कि मैनावती महान क्रांतिकारी नाना साहब पेशवा की दत्तक पुत्री थीं। नाना साहब की सेना ने अंग्रेजी हुकूमत के दांत पूरी तरह खट्टे कर दिए थे।

अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए नन्ही मैनाकुमारी भी इतनी छोटी सी उम्र में देश की आजादी की जंग में कूद पड़ी थीं। ब्रिटिश सैनिकों ने बिठूर पर कब्जे के बाद मासूम बच्ची को बंधक बना लिया। क्रूर अंग्रेज अफसरों ने उनसे नाना साहब के गुप्त ठिकानों के बारे में पूछताछ की थी।

क्रूर ब्रिटिश अधिकारी आउटरम ने दी थी खौफनाक सजा

देशभक्ति से ओतप्रोत नन्ही मैनाकुमारी ने भारी यातनाओं के बावजूद अंग्रेजों के सामने अपना मुंह नहीं खोला। इस बात से बौखलाए क्रूर ब्रिटिश अधिकारी आउटरम ने अमानवीयता की सारी हदें पार कर दीं। उसने मासूम लड़की को सरेआम पेड़ से बांधकर जिंदा जलाने का खौफनाक आदेश दे दिया।

इस महान और रोंगटे खड़े कर देने वाले बलिदान के बाद भी मैनावती मार्ग पर आज सन्नाटा पसरा है। इतिहास के इस गौरवशाली अध्याय को संजोने के लिए शासन स्तर पर त्वरित कार्रवाई की जरूरत है। ताकि आने वाली पीढ़ियां देश की इस महान और जांबाज बेटी को हमेशा याद रख सकें।

Author: Ajay Mishra

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