Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के शिक्षकों, शिक्षामित्रों और सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी कड़ी में अब अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों को भी इस योजना से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग ने इन संस्थानों में कार्यरत समस्त स्टाफ का विस्तृत विवरण जुटाने के निर्देश दिए हैं, जिससे भविष्य में उन्हें बिना किसी नकद भुगतान के बेहतर इलाज मिल सके।
उप शिक्षा निदेशक ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को जारी किया पत्र
कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के क्रम में उप शिक्षा निदेशक (संस्कृत) रामाज्ञा कुमार ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को 30 अप्रैल को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से एडेड संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का डेटा एक निर्धारित प्रारूप पर मांगा गया है। विभाग का मुख्य उद्देश्य इन कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और विवरण का मिलान करना है, ताकि योजना के कार्यान्वयन के समय किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए।
पोर्टल पर प्रमाणीकरण के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति
योजना को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जिला स्तर पर विशेष व्यवस्था की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा एक पोर्टल के माध्यम से डेटा का प्रमाणीकरण किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक जनपद में एक नोडल अधिकारी नामित करने का निर्णय लिया गया है। यह नोडल अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि शिक्षकों और कर्मचारियों का जो विवरण भेजा जा रहा है, वह पूरी तरह सही और प्रमाणित हो। पोर्टल पर डेटा फीड होने के बाद ही कर्मचारियों के हेल्थ कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
शासन स्तर पर लिया जाएगा अंतिम निर्णय
उप निदेशक संस्कृत ने बताया कि सभी जनपदों से विवरण प्राप्त होने के बाद इसकी पूरी रिपोर्ट शिक्षा निदेशक को सौंपी जाएगी। डेटा संकलन की इस प्रक्रिया को कैशलेस सुविधा की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, योजना को लागू करने की अंतिम तिथि और इसके लाभों की विस्तृत रूपरेखा पर निर्णय शासन स्तर से लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार बजट सत्र के बाद इस संबंध में आधिकारिक घोषणा कर सकती है, जिससे हजारों संस्कृत शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी।
अशासकीय सहायता प्राप्त संस्थानों में खुशी की लहर
सरकार के इस फैसले से एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों के कर्मचारियों में भारी उत्साह है। लंबे समय से ये शिक्षक भी राजकीय शिक्षकों की तर्ज पर चिकित्सा सुविधाओं की मांग कर रहे थे। कैशलेस सुविधा मिलने के बाद इन कर्मचारियों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अपनी जमा पूंजी खर्च करने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे सरकारी और अनुबंधित निजी अस्पतालों में अपना और अपने आश्रितों का निःशुल्क इलाज करा सकेंगे। यह कदम संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षकों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


