कचहरी परिसर में गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता को उठा प्रसव दर्द, अस्पताल में दिया बेटे को जन्म

Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ नौ माह की एक गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता को उस समय प्रसव पीड़ा शुरू हो गई, जब पुलिस उसे बयानों के लिए कचहरी परिसर लेकर पहुंची थी। आनन-फानन में पुलिस कर्मियों ने मानवता दिखाते हुए पीड़िता को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया है। बाल कल्याण समिति (CWC) ने पीड़िता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए उसे परिवार के सुपुर्द कर दिया है और पुलिस को पीड़िता के उपचार का पूरा खर्च उठाने का सख्त निर्देश दिया है।

फेरी वाले ने किशोरी को बनाया हवस का शिकार

यह दर्दनाक मामला कंकरखेड़ा क्षेत्र के होली चौक का है। यहाँ संदीप कुमार नामक युवक कॉलोनियों में कबाड़ खरीदने की फेरी लगाता था। इसी दौरान उसने क्षेत्र की एक नाबालिग किशोरी को अपने झांसे में ले लिया। आरोप है कि पिछले साल 9 अगस्त को संदीप ने किशोरी को बहला-फुसलाकर लाला मोहम्मदपुर रोड स्थित एक सेलिब्रेशन मंडप में बुलाया। मंडप स्वामी महेंद्र प्रताप वर्मा ने आरोपी को एक कमरा उपलब्ध कराया, जहाँ संदीप ने किशोरी के साथ हैवानियत की और किसी को बताने पर परिवार को जान से मारने की धमकी दी।

पांच माह की गर्भवती होने पर खुला राज

किशोरी डर के कारण महीनों तक चुप रही, लेकिन जब वह पांच माह की गर्भवती हो गई, तब परिजनों को इस दरिंदगी का पता चला। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने विरोध किया, तो आरोपी संदीप और मंडप स्वामी महेंद्र प्रताप ने उन्हें पुलिस के पास जाने पर पूरे परिवार को तबाह करने की धमकी दी। समाज के डर और लोक-लाज के कारण परिवार ने किशोरी को घर के भीतर ही कैद कर दिया था। लेकिन जब गर्भावस्था नौवें महीने में पहुंची और पड़ोस में चर्चा शुरू हुई, तब जाकर हिम्मत जुटाकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।

अस्पताल में गूंजी किलकारी, पीड़िता ने लिया बड़ा फैसला

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी संदीप और मंडप स्वामी को जेल भेज दिया है। शुक्रवार को पुलिस पीड़िता को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश करने के बाद कोर्ट में 164 के बयान दर्ज कराने ले जा रही थी। एसआई प्रमोद कुमार ने बताया कि अचानक दर्द बढ़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया। प्रसव के बाद किशोरी ने साहस का परिचय देते हुए कहा कि वह अपने बेटे की परवरिश खुद करेगी। पीड़िता के इस फैसले के बाद अस्पताल स्टाफ और पुलिस ने उसकी मानसिक मजबूती की सराहना की है।

पुलिस उठाएगी इलाज का खर्च, सख्त पैरवी का भरोसा

बाल कल्याण समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी। पुलिस ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया है कि वे इस मामले में अदालत में मजबूत पैरवी करेंगे ताकि आरोपियों को उम्रकैद जैसी सख्त से सख्त सजा मिल सके। फिलहाल, जिला अस्पताल के डॉक्टरों की टीम किशोरी और उसके नवजात शिशु की निगरानी कर रही है। आरोपियों के जेल जाने के बाद अब परिवार को न्याय की आस जगी है।

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