United States News: दुनिया एक बार फिर कोरोना के साये में ठिठकती नजर आ रही है। अमेरिका समेत 20 से ज्यादा देशों में कोविड के मामलों ने अचानक रफ्तार पकड़ ली है। इस बार विलेन बना है नया वेरिएंट SARS-CoV-2 BA.3.2, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी ने भी माना है कि यह वेरिएंट तेजी से पांव पसार रहा है। लोग अब डरे हुए हैं कि क्या एक बार फिर उन्हें मास्क और लॉकडाउन की पाबंदियों के बीच जीना होगा। आखिर इस नए म्यूटेशन में ऐसा क्या है जो वैज्ञानिकों को डरा रहा है, यह समझना बेहद जरूरी है।
75 म्यूटेशन वाला ‘बहुरूपिया’ वायरस
कोविड का यह BA.3.2 वेरिएंट असल में नया नहीं है। साल 2024 में दक्षिण अफ्रीका में इसके शुरुआती मामले देखे गए थे, लेकिन अब यह अमेरिका में तबाही मचा रहा है। इस वेरिएंट की सबसे खतरनाक बात इसके स्पाइक प्रोटीन पर मौजूद 75 म्यूटेशन हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि यह वायरस बहुत तेजी से अपना रूप बदल रहा है। लगातार हो रहे इन बदलावों की वजह से यह हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को चकमा देने में माहिर हो गया है। यही कारण है कि यह फिर से एक्टिव होकर दुनिया को डरा रहा है।
क्या भारत में भी बढ़ेगा खतरा?
महामारी विशेषज्ञ डॉ. जुगल किशोर के अनुसार, फिलहाल भारत में इस नए वेरिएंट का कोई मामला सामने नहीं आया है। राहत की बात यह है कि हमारे देश में एक बड़ी आबादी को टीका लग चुका है। जानकारों का कहना है कि इस वेरिएंट के लक्षण अब तक हल्के ही पाए गए हैं, इसलिए फिलहाल घबराने जैसी कोई बात नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और वैश्विक जुड़ाव को देखते हुए दूसरे देशों में केस बढ़ने की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। संक्रमण फैल सकता है, लेकिन किसी गंभीर खतरे की संभावना कम ही नजर आती है।
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग: क्या गाइडलाइन बदलेगी?
लोग अक्सर पूछ रहे हैं कि क्या फिर से मास्क पहनना अनिवार्य होगा? फिलहाल सरकार की ओर से ऐसी कोई सख्त गाइडलाइन नहीं है। लेकिन डॉक्टर सलाह देते हैं कि अस्पताल, बस, मेट्रो और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना एक समझदारी भरा फैसला होगा। इससे न केवल कोरोना बल्कि हवा से फैलने वाली दूसरी बीमारियों से भी बचाव होगा। सावधानी हमेशा इलाज से बेहतर होती है, इसलिए सतर्क रहना हमारी जिम्मेदारी है।
वैक्सीन और बूस्टर डोज़ की जरूरत
अच्छी खबर यह है कि दुनिया भर में व्यापक स्तर पर वैक्सीनेशन हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही पुरानी वैक्सीन संक्रमण को 100 प्रतिशत न रोक पाए, लेकिन यह शरीर में गंभीर लक्षण पैदा नहीं होने देगी। चूंकि यह वेरिएंट पहले भी देखा जा चुका है, इसलिए फिलहाल नई बूस्टर डोज़ की कोई तत्काल जरूरत महसूस नहीं की जा रही है। भारत की इम्युनिटी और वैक्सीनेशन रिकॉर्ड को देखते हुए हम किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार दिख रहे हैं।


